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जंगल पर हमला: अफसरों की लापरवाही से हरे पेड़ों की बलि, बंगले के पीछे ही मिला लाखों की लकड़ियों का जखीरा”

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कवर्धा , एक ओर जहां पर्यावरण संरक्षण और हरियाली बनाए रखने को लेकर सरकार और समाज तमाम प्रयास कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नज़र आ रही है। उप वनमंडल पंडरिया के वन परिक्षेत्र (पूर्व) में जंगलों की बेरहमी से हो रही कटाई इसका ताजा उदाहरण है। यहां खेती के नाम पर लंबे समय से हरे-भरे पेड़ों को काटा जा रहा था, लेकिन वन विभाग की आंखों में इस पर जैसे पट्टी बंधी हुई थी।

आखिरकार जागा वन विभाग, कार्रवाई

पंडरिया नगरपालिका के वार्ड क्रमांक (एक ) समरूपारा में वन विभाग ने आखिरकार छापामार कार्रवाई कर लाखों की कीमत की सागौन और अन्य कीमती लकड़ियों का जखीरा जब्त किया है। इन लकड़ियों को जंगल से अवैध रूप से काटकर एक मकान में छुपाकर रखा गया था। इन्हें फर्नीचर, दरवाजे, खिड़कियां और अन्य निर्माण कार्यों में इस्तेमाल करने के लिए तैयार किया जा रहा था।

अफसरों के घर से बेहद करीब मिला अवैध जखीरा

चौंकाने वाली बात यह है कि यह पूरा जखीरा उप वनमण्डल अधिकारी , वन परिक्षेत्र अधिकारी (पश्चिम) के कार्यालय और सरकारी निवास से महज एक किलोमीटर की दूरी पर मिला है। जबकि पूर्व वन परिक्षेत्र अधिकारी के कार्यालय से यह स्थान डेढ़ किलोमीटर के भीतर ही है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या अफसरों को इसकी भनक नहीं थी या फिर जानबूझकर आंखें मूंद रखी थीं ।

क्या सिर्फ छापा मारना ही है समाधान

स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह कार्रवाई महज खाना पूर्ति और वाहवाही लूटने का प्रयास है। पिछले कई वर्षों से इलाके में जंगल की अवैध कटाई होती रही है, लेकिन विभाग ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया। सवाल यह भी उठता है कि जब पर्यावरण पर मंडरा रहे खतरे साफ दिखाई दे रहे हैं, तो जिम्मेदार अधिकारी अब तक चुप क्यों बैठे थे?

हरियाली पर संकट, पर्यावरण को नुकसान

वनों की अंधाधुंध कटाई का असर सिर्फ प्राकृतिक संतुलन पर नहीं पड़ता, बल्कि इससे स्थानीय जलवायु, जैव विविधता और जंगली जीवों के आवास पर भी गंभीर खतरा मंडराने लगता है। आज जब ग्लोबल वार्मिंग और क्लाइमेट चेंज जैसे मुद्दों पर पूरी दुनिया चिंतित है, ऐसे में स्थानीय स्तर पर इस तरह की लापरवाही पर्यावरण के लिए बेहद घातक साबित हो सकती है।

मांग: सख्त कार्रवाई और निगरानी तंत्र की जरूरत

इस घटना ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि पर्यावरण संरक्षण की बातें सिर्फ कागजों तक सीमित हैं। ज़रूरत है एक मजबूत निगरानी तंत्र की, जो न सिर्फ अवैध कटाई को रोक सके, बल्कि दोषियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई भी सुनिश्चित करे।

 

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