कवर्धा , बोड़ला ब्लॉक के ग्राम अचानकपुर में शारदीय नवरात्रि पर्व के पावन अवसर पर मां दुर्गा की मूर्ति स्थापना के साथ ही धार्मिक और आध्यात्मिक वातावरण बना हुआ है। ग्रामवासियों की पहल पर इस अवसर पर श्रीरामचरितमानस कथा प्रवचन का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी और श्रद्धालुजन उपस्थित रहे।
कथा वाचन मानस वक्ता श्री सत्यव्रत शास्त्री जी (ग्राम केशलमरा कुंडा, जिला कवर्धा, छत्तीसगढ़) ने निभा रहे हैं वे मृत्युंजय आश्रम अमरकंटक संस्था के विद्वान प्रवचनकार हैं और अपने सशक्त वाणी, सरल शैली तथा गहन आध्यात्मिक ज्ञान के लिए चर्चित हैं।
शास्त्री जी ने प्रवचन में श्रीरामचरितमानस के गूढ़ प्रसंगों को सरल भाषा में प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि विराट ब्रह्मांड में जितने भी लोक और लोकांतर हैं, उनमें पद-प्रतिष्ठा और श्रेष्ठ स्थान की प्राप्ति देवताओं की पूजा-अर्चना और तपस्या से ही संभव होती है। जीवन में तपस्या का विशेष महत्व है, और तपस्या का दूसरा नाम मेहनत है।
उन्होंने कहा कि यदि मनुष्य परिश्रम और त्याग का मार्ग अपनाता है, तो न केवल व्यक्तिगत उन्नति करता है बल्कि समाज में भी आदर्श स्थापित करता है। शास्त्री जी ने आपसी भाईचारे और सौहार्द्र बनाए रखने का संदेश देते हुए कहा कि धर्म का वास्तविक स्वरूप परस्पर सहयोग और प्रेम में है।
ग्रामवासी और क्षेत्रवासी बड़ी श्रद्धा से कथा श्रवण कर रहे हैं। प्रवचन स्थल पर भक्तिभाव और आध्यात्मिक वातावरण छाया रहा। इस अवसर पर बिसेलाल पटेल सहित अनेक ग्रामवासी उपस्थित होकर कथा श्रवण का लाभ लिए।
ग्रामाचर्य पूज्य श्री श्यामनारायण पाठक जी ने भी आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
अचानकपुर में आयोजित यह श्रीरामकथा न केवल शारदीय नवरात्रि पर्व को धार्मिक गरिमा प्रदान कर रही है, बल्कि ग्रामवासियों को सद्भाव, परिश्रम और भाईचारे का अमूल्य संदेश भी दे रही है। इस प्रकार के आयोजन ग्राम समाज में आध्यात्मिक ऊर्जा और सामाजिक एकता के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रहे हैं।