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कबीरधाम में कांग्रेस की जमीन खिसकी, नेताओं की चुप्पी और प्रशासनिक रिश्तों पर उठ रहे सवाल

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कवर्धा। छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में कांग्रेस की राजनीतिक जमीन लगातार खिसकती नजर आ रही है। विधानसभा चुनाव में पराजय के बाद से स्थानीय संगठन की सक्रियता पर सवाल उठ रहे हैं। पूर्व मंत्री मोहम्मद अकबर ने हार के बाद अब तक क्षेत्र में दोबारा झांक कर नहीं देखा, जिससे कार्यकर्ताओं का मनोबल लगातार गिरता जा रहा है।
वहीं, लोकसभा चुनाव में हार के बाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल शुरुआती दौर में कबीरधाम में सक्रिय दिखे, लेकिन लोहारीडीह प्रकरण के बाद से उनका यहां आगमन बंद हो गया है। इससे कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच यह चर्चा तेज है कि शीर्ष नेतृत्व की निष्क्रियता ने संगठन को कमजोर कर दिया है।
जिले के जिम्मेदार अफसर को लेकर भी राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हैं। बताया जा रहा है कि उनके कथित पारिवारिक और व्यक्तिगत रिश्तों को लेकर राजनीतिक अटकलें लगाई जा रही हैं। साथ ही यह भी चर्चा है कि इन अधिकारियों के सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों से ही मधुर संबंध हैं, जिससे प्रशासनिक कार्यों और निर्णयों को लेकर कई बार सवाल उठते रहे हैं। हालांकि इस विषय पर प्रशासन या कांग्रेस की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
इधर, हाल ही में भाजपा युवा मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष के आगमन के दौरान विरोध प्रदर्शन की कोशिश करने वाले कांग्रेस कार्यकर्ताओं को स्थानीय स्तर पर विरोधियों की प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ा। घटना के बाद से कांग्रेस कार्यकर्ताओं में असंतोष और निराशा देखने को मिल रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कबीरधाम में कांग्रेस की स्थिति संभालने के लिए संगठन को नए सिरे से पुनर्गठित करने और सक्रिय नेतृत्व देने की आवश्यकता है, वरना आने वाले चुनावों में पार्टी को और बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
 यह खबर पूरी तरह सार्वजनिक राजनीतिक गतिविधियों और विश्लेषणों पर आधारित है। किसी व्यक्ति विशेष पर प्रत्यक्ष आरोप नहीं है।

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