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“अभयारण्य में सफारी तैयारी पर सवाल: WBM सड़क पर ‘मुरम’ के नाम पर मिट्टी की लीपापोती!”

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भोरमदेव अभयारण्य क्षेत्र में जनवरी 2026 से प्रस्तावित जंगली सफारी की तैयारी चल रही है, लेकिन सफारी शुरू होने से पहले ही विभागीय कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्न उठ खड़े हुए हैं। बांधा बैरियर से जामुनपानी बैरियर के बीच मुख्य मार्ग पर बनी हुई डब्ल्यूबीएम सड़क पर मुरम बिछाने के नाम पर जंगली मिट्टी और पतली ‘थूक पॉलिश’ जैसी परत डाले जाने की जानकारी सामने आई है। इससे विभाग की कार्यशैली व मंशा पर ग्रामीणों और राहगीरों दोनों ने गहरी नाराजगी व्यक्त की है।

 ग्रामीणों का कहना है कि यह मार्ग अभयारण्य क्षेत्र की प्रमुख कड़ी है और रोजाना यहां से सैकड़ों लोग आवाजाही करते हैं। लेकिन सड़क पर मानकों के विपरीत घटिया मिट्टी बिछाने से वाहन फंस रहे हैं, धूल उड़ रही है और बारिश में फिसलन बढ़ने का खतरा बना हुआ है। लोगों ने आरोप लगाया कि विभाग सिर्फ कागजी खानापूर्ति कर रहा है, जबकि वास्तविक स्थिति जमीनी स्तर पर बेहद खराब है।

राहगीरों ने बताया कि जहां सड़क को मजबूत और सुरक्षित बनाने की जरूरत थी, वहीं मिट्टी की ढीली परत डालकर इसे और भी जोखिम भरा बना दिया गया है। सफारी सीजन में जब पर्यटकों की आवाजाही बढ़ेगी, तब यही सड़क दुर्घटनाओं और अव्यवस्था का कारण बन सकती है।

यह मामला तब और गंभीर होता है जब हाल ही में भोरमदेव अभयारण्य के चिल्फी परिक्षेत्र में बायसन के शिकार की घटना ने वन संरक्षण पर सवाल खड़े किए थे। अब सड़क में म

मुरम बिछाई में गुणवत्ता से समझौता होने की खबरों ने अभयारण्य प्रबंधन की प्राथमिकताओं और जिम्मेदारी को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है।

ग्रामीणों और क्षेत्रवासियों का कहना है कि अभयारण्य का विकास, वन्यजीवों की सुरक्षा और पर्यटन को बढ़ावा देना जरूरी है, लेकिन लीपापोती वाले कार्य न सिर्फ योजनाओं पर दाग लगाते हैं बल्कि जनता के भरोसे को भी कमजोर करते हैं।

कुल मिलाकर, सड़क निर्माण में मानकों की अनदेखी ने न केवल सफारी योजना बल्कि विभाग की विश्वसनीयता पर भी बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।

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