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वन्दे मातरम् से जवाबदेही तक: विधानसभा में विधायक भावना बोहरा का सशक्त राष्ट्रवादी हस्तक्षेप, शिक्षक भर्ती, भ्रष्टाचार और शिक्षा व्यवस्था पर सरकार से सीधे सवाल”

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छत्तीसगढ़ विधानसभा के शीतकालीन सत्र के चौथे दिन पंडरिया विधायक भावना बोहरा ने राष्ट्रभावना और प्रशासनिक जवाबदेही—दोनों को एक साथ केंद्र में रखते हुए सदन में प्रभावशाली हस्तक्षेप किया। उन्होंने राष्ट्रीय गीत वन्दे मातरम् पर आयोजित विशेष चर्चा में सहभागिता निभाते हुए इसे स्वतंत्रता आंदोलन की आत्मा बताया और कहा कि अपने इतिहास, संस्कृति और मूल्यों पर गर्व करना राजनीति नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी है।
विधायक बोहरा ने कहा कि वन्दे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि वह चेतना है जिसने देश के क्रांतिकारियों को हंसते-हंसते बलिदान के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कांग्रेस पर तीखा सवाल दागते हुए कहा कि इतिहास को याद करना और अपनी जड़ों को स्वीकार करना यदि राजनीति कहलाता है, तो नया भारत इस “राजनीति” पर गर्व करता है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सांस्कृतिक गौरव के पुनर्जागरण को विकसित भारत की दिशा में निर्णायक कदम बताया।
राष्ट्रवादी विमर्श के साथ-साथ भावना बोहरा ने शासन-प्रशासन से जुड़े ज्वलंत मुद्दों पर सरकार को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने ईओडब्ल्यू/एसीबी द्वारा दर्ज प्रकरणों में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों पर कार्रवाई में हो रही देरी को उजागर किया। उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा के लिखित उत्तर के अनुसार, दो वित्तीय वर्षों में पांच अधिकारियों के मामलों में अब तक पूर्वानुमोदन नहीं दिया गया है, जिससे भ्रष्टाचार पर कार्रवाई की गति पर गंभीर प्रश्न खड़े हुए हैं।
उन्होंने पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों को अन्य विभागों में अतिरिक्त प्रभार दिए जाने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाया, जिसमें पांच मामलों में भारसाधक मंत्री की स्वीकृति नहीं होने की बात सामने आई।
शिक्षा व्यवस्था पर विधायक बोहरा ने शासकीय विद्यालयों में पुस्तक वितरण, शिक्षक भर्ती और मध्याह्न भोजन से जुड़ी घटनाओं को गंभीरता से उठाया। उन्होंने शिक्षक भर्ती प्रक्रिया की स्थिति, वनांचल क्षेत्रों में शिक्षक विहीन व एकल शिक्षक विद्यालयों की संख्या, तथा बच्चों के बीमार होने की घटनाओं में जिम्मेदार SHG/NGO पर कार्रवाई का मुद्दा सदन में रखा। लिखित उत्तर में सरकार ने बताया कि 19 विद्यालय शिक्षक विहीन और 1178 विद्यालय एकल शिक्षक हैं, जबकि मध्याह्न भोजन प्रकरणों में दोषी समूहों का अनुबंध रद्द किया गया है।
भावना बोहरा का यह हस्तक्षेप केवल सवालों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि राष्ट्रभक्ति, पारदर्शिता और जवाबदेही—तीनों साथ चलें, तभी सुशासन और विकसित भारत का लक्ष्य हासिल होगा।

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