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नरेगा नियमों की खुली अवहेलना! भाटापारा में तकनीकी सहायकों से गैर-नरेगा कार्य, कलेक्टर की जवाबदेही तय

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छत्तीसगढ़ शासन पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) के तहत कार्यरत संविदा/मानदेय अधिकारियों एवं कर्मचारियों से योजना के अतिरिक्त कोई अन्य कार्य नहीं लेने के स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं। इसके बावजूद भाटापारा जनपद पंचायत में इन निर्देशों की खुलेआम अनदेखी सामने आई है।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, मंत्रालय महानदी भवन, नवा रायपुर द्वारा पत्र क्रमांक वि-7/स्था./MGNREGA/2025 दिनांक 28.11.2025 के माध्यम से समस्त जिला कार्यक्रम समन्वयकों (कलेक्टरों) को स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि नरेगा कर्मियों को अन्य कार्य सौंपे जाते हैं और इससे योजना की प्रगति प्रभावित होती है, तो संबंधित जिला कार्यक्रम समन्वयक व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी होंगे।
यह निर्देश भारत सरकार, ग्रामीण विकास मंत्रालय के पत्र (30.03.2007), छत्तीसगढ़ शासन के पूर्व जारी पत्रों (01.04.2007, 20.01.2020, 30.05.2020), तथा आयुक्त मनरेगा के पत्र (08.12.2021 एवं 11.10.2025) के क्रम में पुनः दोहराया गया है। इन सभी में स्पष्ट है कि भारत सरकार केवल इस शर्त पर वेतन/मानदेय का वहन करती है कि ये कर्मचारी केवल मनरेगा का कार्य करेंगे।
भाटापारा में आदेश की अवहेलना
इसके विपरीत, कार्यालय अनुविभागीय अधिकारी, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा, उप संभाग भाटापारा द्वारा जारी पत्र क्रमांक 316/जप/2024, दिनांक 12 सितंबर 2024 के तहत जनपद पंचायत भाटापारा में 05 तकनीकी सहायकों के बीच कार्य विभाजन करते हुए उन्हें मनरेगा के अलावा अन्य कार्यों हेतु पंचायतें आबंटित की गईं।
गैर-नरेगा कार्यों में लगाए गए तकनीकी सहायकों की सूची इस प्रकार है—
लक्ष्मीकांत साहु – 11 पंचायत
रामेश्वर देवांगन – 11 पंचायत
राजेश टंडन – 10 पंचायत
जनेंद्र बंजारे – 13 पंचायत
जितेंद्र सिंह – 09 पंचायत
यह कार्य विभाजन न केवल मनरेगा अधिनियम एवं शासनादेशों का उल्लंघन है, बल्कि सीधे तौर पर योजना की गुणवत्ता, समयबद्धता और पारदर्शिता पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
किसकी बनेगी जिम्मेदारी?
शासन के ताजा निर्देशों के अनुसार, यदि इस प्रकार के आदेशों से मनरेगा की प्रगति प्रभावित होती है, तो जिला कार्यक्रम समन्वयक (कलेक्टर) को व्यक्तिगत रूप से जवाबदेह ठहराया जाएगा। ऐसे में सवाल उठता है कि
क्या भाटापारा में जारी आदेशों की जानकारी जिला प्रशासन को नहीं थी?
या फिर जानबूझकर शासन व आयुक्त मनरेगा के स्पष्ट निर्देशों को नजरअंदाज किया गया?
कड़ी कार्रवाई की मांग
सूत्रों के अनुसार, इस मामले में यदि त्वरित सुधार नहीं हुआ तो यह भारत सरकार द्वारा वहन किए जा रहे मानदेय के दुरुपयोग की श्रेणी में भी आ सकता है। जानकारों का कहना है कि संबंधित आदेश निरस्त कर तकनीकी सहायकों को तत्काल केवल मनरेगा कार्यों में लगाया जाना चाहिए तथा दोषी अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई तय होनी चाहिए।
अब निगाहें शासन और आयुक्त मनरेगा पर टिकी हैं कि वे अपने ही जारी निर्देशों के पालन को लेकर भाटापारा मामले में क्या ठोस कदम उठाते हैं, या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा

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