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ग्रामीण रोजगार की रीढ़ मनरेगा कर्मी खुद असुरक्षित: 20 साल बाद भी स्थायित्व नहीं, 16 माह से लंबित एचआर नीति लागू करने उप मुख्यमंत्री से मांग

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महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के माध्यम से देश के करोड़ों ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराने वाले कर्मचारी आज स्वयं सेवा सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा से वंचित हैं। छत्तीसगढ़ मनरेगा कर्मचारी महासंघ, कबीरधाम जिला संगठन ने इसी गंभीर स्थिति को लेकर उप मुख्यमंत्री एवं पंचायत मंत्री श्री विजय शर्मा से मुलाकात कर 16 माह से लंबित मानव संसाधन (एचआर) नीति को तत्काल लागू करने की मांग करते हुए ज्ञापन सौंपा।

प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि मनरेगा कर्मी पिछले 20 वर्षों से योजना के सुचारु क्रियान्वयन में निरंतर योगदान दे रहे हैं, लेकिन आज भी अस्थायी व्यवस्था के तहत काम करने को मजबूर हैं। न तो उनकी सेवा सुरक्षित है और न ही उन्हें सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिल पा रहा है, जिससे कर्मचारियों में गहरी असंतोष की स्थिति बनी हुई है।
बैठक के दौरान यह जानकारी भी दी गई कि हाल ही में देशभर के मनरेगा कर्मचारी संगठनों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई चर्चा में केंद्रीय पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने छत्तीसगढ़ मनरेगा कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष श्री अजय सिंह क्षत्री को संबोधित करते हुए राज्य शासन से कर्मचारियों की सेवा सुनिश्चित करने, अस्थायी से स्थायी करने और नीति निर्माण पर पहल का आश्वासन दिया था।
उप मुख्यमंत्री एवं पंचायत मंत्री श्री विजय शर्मा ने कर्मचारियों की बातों को गंभीरता से सुनते हुए 16 माह से लंबित मानव संसाधन नीति के मामले में आयुक्त, महात्मा गांधी नरेगा को शीघ्र कार्रवाई के निर्देश दिए जाने की बात कही। साथ ही विकसित भारत–ग्रामीण रोजगार आजीविका मिशन गारंटी के लक्ष्य को हासिल करने में मनरेगा कर्मचारियों की भूमिका को अहम बताया।
इसी क्रम में मनरेगा आयुक्त श्री तारण प्रकाश सिन्हा के प्रथम मुंगेली प्रवास के दौरान कार्यालयीन स्टाफ सहित फील्ड स्तर पर योजनाओं का क्रियान्वयन करने वाले रोजगार सहायकों ने उन्हें मानव संसाधन नीति बनाए जाने एवं लागू करने संबंधी ज्ञापन सौंपा। जिस पर आयुक्त मनरेगा ने एक माह के भीतर मानव संसाधन नीति लागू करने का आश्वासन दिया।
मनरेगा कर्मचारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि तय समय-सीमा में मानव संसाधन नीति लागू नहीं की गई, तो वे चरणबद्ध आंदोलन और फील्ड स्तर पर रणनीतिक कदम उठाने को मजबूर होंगे। कर्मचारियों का कहना है कि ग्रामीणों के अधिकारों की रक्षा करने वाले कर्मियों के अधिकार अब और अनदेखे नहीं किए जा सकते

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