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कबीर की नगरी में शराब माफिया का राज, आबकारी महकमा चखना दुकानों की अवैध वसूली में मस्त सुशासन के दावों के बीच अवैध शराब का खुला कारोबार, जिम्मेदार विभाग मौन

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महान समाज सुधारक कबीरदास की विचारधारा और संत परंपरा के लिए पहचाने जाने वाले कबीरधाम जिले में आज हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि जिला मुख्यालय से लेकर दूरस्थ मजरा-टोला तक अवैध देशी और विदेशी शराब खुलेआम बेची जा रही है। शराब माफिया बेखौफ हैं और कानून व्यवस्था मानो नशे में झूम रही हो।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिले के कई गांवों, वार्डों और टोला-मोहल्लों में सुबह से देर रात तक अवैध शराब की बिक्री निर्बाध रूप से जारी है। न लाइसेंस की परवाह, न नियम-कानून का डर। हालात यह हैं कि शराब अब चोरी-छिपे नहीं, बल्कि खुलेआम परोसी जा रही है।
आबकारी विभाग पर गंभीर सवाल
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिस आबकारी विभाग पर इस पूरे अवैध कारोबार को रोकने की जिम्मेदारी है, वही विभाग कथित तौर पर चखना दुकानों से अवैध वसूली में व्यस्त बताया जा रहा है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, नियमित वसूली के बदले अवैध शराब कारोबारियों को खुली छूट दी जा रही है।
कभी-कभार महुआ की शराब या छोटी-मोटी खेप पकड़कर औपचारिक कार्रवाई कर ली जाती है और उसी को बड़ी उपलब्धि बताकर मीडिया में प्रचारित कर दिया जाता है। जबकि असल खेल बड़े स्तर पर लगातार फल-फूल रहा है।
गांव-गांव शराब, परिवार तबाह
ग्रामीण क्षेत्रों में हालात और भी चिंताजनक हैं। मजरा-टोला तक शराब पहुंचने से युवाओं और मजदूर वर्ग में नशे की लत तेजी से बढ़ रही है। घरेलू हिंसा, सड़क हादसे और आपराधिक घटनाओं में इजाफा हो रहा है, लेकिन प्रशासनिक तंत्र आंखें मूंदे बैठा है।
प्रशासन की चुप्पी, संरक्षण की आशंका
जिले में इतने बड़े पैमाने पर चल रहे अवैध शराब कारोबार के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी कई गंभीर सवाल खड़े करती है। क्या यह लापरवाही है या फिर किसी तरह का मौन संरक्षण? यह सवाल अब सिर्फ कबीरधाम तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनता जा रहा है।
‘धन्य हो कबीरधाम’—जहां आदर्शों की नगरी में नशे का बोलबाला
जिस कबीरधाम को संत कबीर के नाम से जाना जाता है, आज वही जिला शराब माफिया के लिए सुरक्षित ठिकाना बनता नजर आ रहा है। सुशासन, कानून और नैतिकता के दावे जमीनी हकीकत में दम तोड़ते दिख रहे हैं।
अब देखने वाली बात यह होगी कि जिला प्रशासन और राज्य सरकार इस गंभीर मुद्दे पर कब जागती है, या फिर कबीर की नगरी यूं ही शराब के साए में डूबती चली जाएगी।

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