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सरस मेला बना महिलाओं की तरक्की का मंच: दो दिनों में 1.85 लाख का कारोबार, बढ़ा आत्मनिर्भरता का भरोसा

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कवर्धा के सरदार पटेल मैदान में 23 से 26 मार्च तक आयोजित संभागीय सरस मेला न सिर्फ आकर्षण का केंद्र बना हुआ है, बल्कि महिला स्व-सहायता समूहों के लिए आर्थिक सशक्तिकरण का मजबूत मंच भी साबित हो रहा है। महज दो दिनों में ही मेले में शामिल समूहों ने 1 लाख 85 हजार रुपए से अधिक का व्यवसाय कर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है।

मेले में महिलाओं द्वारा तैयार जैविक और घरेलू उत्पादों की खूब मांग देखी जा रही है। दाल, अचार, पापड़, मिलेट बिस्किट, हर्बल फिनायल, साबुन, दोना-पत्तल, अगरबत्ती, हैंडलूम बिरनमाला, चूड़ी-कंगन जैसी दैनिक उपयोग की वस्तुएं किफायती दरों पर उपलब्ध होने के कारण लोगों को विशेष रूप से आकर्षित कर रही हैं। स्थानीय नागरिक बड़ी संख्या में पहुंचकर इन उत्पादों की खरीदारी कर रहे हैं, जिससे महिला समूहों की आय में सीधा इजाफा हो रहा है।

इस संबंध में जिला पंचायत कबीरधाम के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिषेक अग्रवाल ने बताया कि दुर्ग संभाग के सभी सात जिलों के महिला समूह इस मेले में अपने उत्पादों की प्रदर्शनी और विक्रय कर रहे हैं। फूड स्टॉल के साथ-साथ 28 अन्य स्टॉल लगाए गए हैं, जहां से दो दिनों में ही इतनी बड़ी आमदनी होना महिला उद्यमिता की सफलता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यह मेला महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

मेले की रौनक को सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने और भी जीवंत बना दिया है। महेश ठाकुर और उनकी टीम ने देशभक्ति व फिल्मी गीतों से समां बांधा, वहीं माधवेश केसरी सहित अन्य कलाकारों ने रंगारंग प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय के बच्चों के नृत्य और स्थानीय कलाकारों के पारंपरिक छत्तीसगढ़ी गीतों ने मेले में सांस्कृतिक समृद्धि की झलक पेश की।

सरस मेला न केवल खरीदारी और मनोरंजन का केंद्र बना है, बल्कि यह ग्रामीण महिलाओं के हुनर को पहचान दिलाने और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में सार्थक पहल के रूप में उभर रहा है।

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