कवर्धा। जिले में इमरती लकड़ी के अवैध कारोबार का बड़ा जाल फैला हुआ है। आरा मिलों के जरिए सालों से हो रहे अवैध चिरान और काष्ठ की कालाबाजारी पर आखिरकार वन विभाग ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है।
ताजा मामले में सहसपुर लोहारा ब्लॉक के ग्राम पंचायत सिलहाटी स्थित अशोक सा मिल पर उप वनमंडल अधिकारी के नेतृत्व में वन विभाग की टीम ने औचक छापा मारा। जांच के दौरान सा मिल परिसर से भारी मात्रा में अवैध काष्ठ बरामद हुआ। काष्ठ संबंधी लेखा-जोखा में गंभीर अनियमितताएं भी सामने आईं। इस पर सा मिल संचालक अशोक जायसवाल के विरुद्ध छत्तीसगढ़ काष्ठ चिरान अधिनियम 1984 के तहत कार्रवाई करते हुए अवैध काष्ठ जप्त कर लिया गया। विभाग ने इस संबंध में POR प्रकरण क्रमांक 20793/05 दिनांक 23 अगस्त 2025 दर्ज किया है।
जिले में दर्जनों आरा मिल संदेह के घेरे में
सूत्रों के अनुसार जिले में कई आरा मिल बिना वैध अनुमति के संचालित हो रही हैं। इनमें अधिकांश इमरती लकड़ी का चिरान कर स्थानीय और बाहरी बाजारों में सप्लाई कर रहे हैं। लंबे समय से विभागीय निगरानी की कमी के चलते यह कारोबार फल-फूल रहा था। सिलहाटी की कार्रवाई के बाद अब अन्य आरा मिल संचालकों में हड़कंप मच गया है।
बड़े नेटवर्क की ओर इशारा
वन विभाग की कार्रवाई ने संकेत दिया है कि यह केवल एक सा मिल का मामला नहीं है, बल्कि पूरे जिले में फैले अवैध नेटवर्क का हिस्सा है। कई मिलों में रात के अंधेरे में लकड़ी की खेप पहुंचती है और कागजों में हेराफेरी कर काष्ठ को वैध बताने का खेल चलता है।
आगे की कार्रवाई
वन विभाग के अधिकारी मान रहे हैं कि जिले में चल रहे इस पूरे नेटवर्क को उजागर करने के लिए सघन जांच अभियान की आवश्यकता है। कार्रवाई केवल जप्ती तक सीमित न रहकर, बड़े माफिया और उनके संरक्षणकर्ताओं तक पहुंचनी होगी।




