शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता के विरोध में देश की राजधानी दिल्ली के रामलीला मैदान में शनिवार को विशाल धरना-प्रदर्शन और रैली का आयोजन किया गया। इस राष्ट्रव्यापी आंदोलन में विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में शिक्षक शामिल हुए। आयोजन टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (TFI) के बैनर तले किया गया, जिसमें शिक्षकों ने अपने अधिकारों और सेवा शर्तों की रक्षा को लेकर एकजुटता दिखाई।
छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन कबीरधाम के प्रतिनिधि भी सक्रिय भागीदारी निभाते हुए दिल्ली पहुँचे। जिला स्तर के पदाधिकारियों और शिक्षकों ने आंदोलन में शामिल होकर टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग का समर्थन किया। शिक्षकों ने हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर “No TET Before RTE Act” जैसे नारों के साथ अपनी आवाज बुलंद की।
रैली को संबोधित करते हुए विभिन्न राज्यों के पदाधिकारियों ने कहा कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों पर नई पात्रता परीक्षा थोपना न्यायसंगत नहीं है। वक्ताओं ने तर्क दिया कि नियुक्ति के समय निर्धारित मूल सेवा शर्तों का सम्मान किया जाना चाहिए और 20–25 वर्षों से कार्यरत शिक्षकों को पुनः परीक्षा के नाम पर परेशान करना अनुचित है।
आंदोलन की प्रमुख मांगों में संसद में विधेयक लाकर टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करना, पूर्व निर्धारित सेवा शर्तों की रक्षा करना और अनुभवी शिक्षकों को नई परीक्षा से मुक्त रखना शामिल है।
रैली के माध्यम से शिक्षकों ने स्पष्ट संदेश दिया कि वे अपने अधिकारों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखेंगे। अब सभी की निगाहें केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।