कबीरधाम जिले के शिक्षा विभाग में आखिरकार वह हुआ जिसकी चर्चाएं लंबे समय से गलियारों में गूंज रही थीं। वित्तीय अनियमितता और पद के दुरुपयोग के आरोपों में तत्कालीन प्रभारी विकासखंड शिक्षा अधिकारी (कवर्धा) एवं व्याख्याता एल.बी. संजय जायसवाल पर लोक शिक्षण संचालनालय, छत्तीसगढ़ ने कड़ी कार्रवाई करते हुए निलंबन की गाज गिरा दी है।
15 मई 2026 को जारी आदेश में स्पष्ट उल्लेख है कि जिला शिक्षा अधिकारी, कबीरधाम की जांच रिपोर्ट में वित्तीय गड़बड़ियों की पुष्टि हुई है। साथ ही अपने पदस्थ दायित्वों के निर्वहन में स्वेच्छाचारिता और अनुशासनहीनता भी पाई गई। विभाग ने इसे छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम-3 का गंभीर उल्लंघन माना है।
आदेश के मुताबिक, छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 9(1)(क) के तहत तत्काल प्रभाव से श्री जायसवाल को निलंबित कर उनका मुख्यालय कार्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी, बोड़ला जिला कबीरधाम नियत किया गया है। निलंबन अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि शिक्षा जैसे संवेदनशील विभाग में वित्तीय अनियमितता आखिर कैसे पनपी, क्या उच्च अधिकारियों की निगरानी कमजोर थी या फिर मिलीभगत का खेल चल रहा था । यदि समय रहते शिकायत पर संज्ञान लिया जाता तो क्या विभाग की साख पर यह दाग लगता।
अब देखना होगा कि जांच की अगली कड़ी कितनी पारदर्शी और निष्पक्ष होती है। फिलहाल, इस कार्रवाई ने शिक्षा महकमे में हड़कंप मचा दिया है और कई अन्य फाइलों की भी परतें खुलने की आशंका जताई जा रही है।