जिला मुख्यालय कवर्धा में खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। पूरे साल खुली रहने वाली होटलें, रेस्टोरेंट और मिठाई की दुकानें, स्वच्छता और सुरक्षा के बुनियादी मानकों से कोसों दूर हैं। लेकिन प्रशासन की सक्रियता सिर्फ त्योहारों के आसपास ही देखने को मिलती है — जब खानापूर्ति के तहत कुछ सैंपल लिए जाते हैं, नोटिस जारी होते हैं और मीडिया में तस्वीरें प्रकाशित कर विभाग अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेता है।
त्योहारों के बाहर के महीनों में जिले में फूड सेफ्टी की उपस्थिति लगभग शून्य रहती है। होटल किचनों की हालत चिंताजनक है — जगह-जगह गंदगी, बासी तेल का उपयोग, खुले में रखी सामग्री और अस्वच्छ ढंग से खाना बनाते कर्मचारी आमदृश्य बन चुके हैं। अनेक जगहों पर खाने के बर्तनों को भी बिना ढके या साफ किए पुनः परोसा जाता है, जिससे खाद्य जनित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
इससे भी अधिक गंभीर विषय है घरेलू गैस सिलेंडरों का अवैध उपयोग। अधिकांश होटल और ठेले घरेलू गैस सिलेंडर का व्यवसायिक उपयोग कर रहे हैं, जो न सिर्फ नियमों का उल्लंघन है, बल्कि एक बड़े हादसे की संभावना को भी जन्म देता है। सुरक्षा मानकों की घोर अनदेखी के बावजूद कोई स्थायी निगरानी या कार्रवाई नहीं की जाती।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पूरे साल वे इन होटलों से भोजन लेने को विवश हैं, लेकिन उनके स्वास्थ्य की सुरक्षा व्यवस्था केवल त्योहारों तक सीमित रहती है। नागरिकों की मांग है कि प्रशासन को इस पूरे मामले को केवल एक ‘सीजनल औपचारिकता’ न मानते हुए, पूरे साल नियमित निरीक्षण, कड़ाई से नियमों का पालन और होटल व्यवसायियों में जवाबदेही तय करने की ठोस व्यवस्था करनी चाहिए। साथ ही घरेलू गैस सिलेंडरों के दुरुपयोग पर सख्त कार्रवाई कर, स्वच्छता व सुरक्षा को लेकर स्थायी और पारदर्शी तंत्र विकसित करना चाहिए ताकि जनता को सुरक्षित, साफ और गुणवत्तापूर्ण भोजन सुनिश्चित किया जा सके।
कवर्धा में फूड सेफ्टी व्यवस्था की यह मौसमी सतर्कता अब पर्याप्त नहीं। जनता को त्योहारों के नहीं, हर दिन के भोजन में सुरक्षा चाहिए — और इसके लिए विभाग को अब अपनी नींद से जागना होगा।