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इलाज के नाम पर दरिंदगी: मानसिक रूप से अस्वस्थ युवती से दुष्कर्म के आरोप में आयुर्वेदिक चिकित्सक गिरफ्तार

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कवर्धा। जिले के लोहारा थाना क्षेत्र में उपचार के नाम पर एक मानसिक रूप से अस्वस्थ युवती के साथ कथित दुष्कर्म का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस घटना ने एक बार फिर समाज में चिकित्सकीय पेशे से जुड़े लोगों पर विश्वास और महिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़िता के परिजनों की शिकायत के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी आयुर्वेदिक चिकित्सक को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बिडोरा क्षेत्र में आयुर्वेदिक उपचार करने वाले बालक दास चंदेल पर आरोप है कि उसने इलाज के बहाने एक मानसिक रूप से अस्वस्थ युवती की मजबूरी और कमजोर स्थिति का फायदा उठाते हुए उसके साथ जबरन दुष्कर्म किया। घटना की जानकारी मिलने के बाद परिजनों ने थाना लोहारा पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस हरकत में आई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 64(1) के तहत अपराध पंजीबद्ध कर जांच शुरू की। प्रारंभिक जांच, पीड़िता एवं परिजनों के बयान तथा अन्य साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने आरोपी बालक दास चंदेल, उम्र 35 वर्ष, निवासी ढोढमानवापारा को गिरफ्तार कर लिया।
यह मामला इसलिए भी बेहद गंभीर माना जा रहा है क्योंकि आरोप एक ऐसे व्यक्ति पर लगा है, जिसके पास लोग उपचार और विश्वास के साथ पहुंचते हैं। समाज में चिकित्सकों को सेवा और संवेदनशीलता का प्रतीक माना जाता है, लेकिन यदि उपचार के नाम पर ही महिलाओं और कमजोर वर्गों का शोषण होने लगे, तो यह न केवल कानून बल्कि मानवता के लिए भी चिंता का विषय है।
मानसिक रूप से अस्वस्थ युवती के साथ हुई इस घटना ने महिलाओं और कमजोर वर्गों की सुरक्षा को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सामाजिक संगठनों का मानना है कि ऐसे मामलों में कठोर कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ जागरूकता और निगरानी व्यवस्था को भी मजबूत किए जाने की आवश्यकता है।
पुलिस ने आरोपी को न्यायालय में प्रस्तुत कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है। मामले की आगे की जांच जारी है और पुलिस अन्य तथ्यों की भी बारीकी से पड़ताल कर रही है।
यह घटना एक बार फिर यह संदेश देती है कि महिलाओं, बालिकाओं और मानसिक रूप से कमजोर व्यक्तियों के विरुद्ध होने वाले अपराधों के प्रति समाज और प्रशासन दोनों को अधिक संवेदनशील और सतर्क रहने की आवश्यकता है। ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई और कठोर दंड ही पीड़ितों को न्याय दिलाने तथा समाज में कानून के प्रति विश्वास बनाए रखने का प्रभावी माध्यम बन सकता है।

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