भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना के शेयर वितरण कार्यक्रम में किसानों को वर्षों बाद अंशधारी सदस्यता का अधिकार मिला, मंच पर उप मुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक विजय शर्मा सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे, लेकिन कार्यक्रम की सबसे ज्यादा चर्चा किसानों के शेयर से ज्यादा एक भाषण की होने लगी।

पूर्व विधायक एवं पूर्व संसदीय सचिव मोतीराम चंद्रवंशी के संबोधन ने राजनीतिक गलियारों में नई फुसफुसाहट पैदा कर दी। मंच से विकास, नीति और नियत पर दिए गए उनके बयान को कई लोग सीधे तौर पर पंडरिया विधायक भावना बोहरा की कार्यशैली पर कटाक्ष के रूप में देख रहे हैं। अब सवाल यह है कि यह केवल राजनीतिक संयोग था या फिर कोई सोचा-समझा संदेश?
कार्यक्रम खत्म होते-होते सोशल मीडिया पर चर्चा शुरू हो गई—”जब मंच पर सब साथ दिखे, तो फिर शब्दों में इतनी धार क्यों?” राजनीतिक जानकार इसे पंडरिया की बदलती सियासत का संकेत मान रहे हैं। कुछ लोग इसे आगामी राजनीतिक समीकरणों की भूमिका बता रहे हैं तो कुछ इसे “दिल की बात जुबान पर आने” की घटना मान रहे हैं।





