धारा 40 की कार्रवाई की चर्चा के बीच भाजपा समर्थित पंच के नाम पर मंथन, दल बदल की पेशकश से गरमाया माहौल
कवर्धा । पंडरिया विधानसभा क्षेत्र की सबसे बड़ी ग्राम पंचायतों में शुमार कुंडा में इन दिनों पंचायत की कुर्सी से लेकर नगर पंचायत बनने तक की राजनीतिक चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है। 20 वार्डों वाली इस ग्राम पंचायत में वर्तमान सरपंच हरेंद्र चंद्राकर के खिलाफ शिकायत और सक्षम अधिकारी के न्यायालय में चल रही प्रक्रिया के बीच सत्ता के नए समीकरणों की सुगबुगाहट तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार, धारा 40 के तहत कार्रवाई की संभावनाओं के साथ ही भाजपा समर्थित पंच को सरपंच की जिम्मेदारी सौंपने और कुंडा को नगर पंचायत बनाने की राजनीतिक कवायद को लेकर अंदरखाने चर्चा चल रही है।
पुराने घटनाक्रम ने फिर खींचा ध्यान
कुंडा की पंचायत राजनीति में दलगत निष्ठा और सत्ता के समीकरण पहले भी सुर्खियों में रहे हैं। पूर्व सरपंच महेश्वर साहू भारतीय जनता पार्टी के पदाधिकारी रहे हैं। बाद में उन्होंने भाजपा से त्यागपत्र दे दिया और तत्कालीन सत्तासीन कांग्रेस से जुड़े नेताओं के साथ उनकी राजनीतिक नजदीकियां बढ़ने की चर्चा रही। उस दौर में कांग्रेस से जुड़े लोगों द्वारा तत्कालीन सरपंच के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव सहित कई शिकायतें किए जाने की बात सामने आई थी।
सूत्रों के मुताबिक, भाजपा से अलग होने के बाद महेश्वर साहू कांग्रेस में औपचारिक रूप से शामिल नहीं हुए, लेकिन सत्ता पक्ष के नेताओं के साथ उनकी सक्रियता और उठना-बैठना स्थानीय राजनीति में चर्चा का विषय बना रहा। इसी दौरान उनके खिलाफ चल रही शिकायतों को लेकर भी राजनीतिक परिस्थितियों में बदलाव की चर्चा होती रही।
अब हरेंद्र चंद्राकर पर कार्रवाई की चर्चा
वर्तमान में कांग्रेस से जुड़े हरेंद्र चंद्राकर सरपंच पद पर काबिज हैं। सूत्रों के अनुसार, भाजपा से जुड़े लोगों की ओर से उनके खिलाफ शिकायत की गई है। मामला सक्षम अधिकारी के न्यायालय में विचाराधीन बताया जा रहा है और संबंधित प्रक्रिया जारी है।
इसी के बीच राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि धारा 40 के तहत सरपंच के खिलाफ कार्रवाई होती है, तो पंचायत की कमान किसके हाथ जाएगी। सूत्रों के अनुसार, भाजपा समर्थित पंच को सरपंच बनाए जाने की संभावनाओं को लेकर स्थानीय स्तर पर राजनीतिक सक्रियता बढ़ी है।
सरपंची से आगे नगर पंचायत का गणित
कुंडा में चर्चा केवल सरपंच पद तक सीमित नहीं है। सूत्रों के अनुसार, कुंडा को नगर पंचायत का स्वरूप देने की संभावित राजनीतिक कवायद को लेकर भी अंदरखाने बातचीत चल रही है। पंचायत में 20 वार्ड होने के कारण प्रस्तावित बदलाव की चर्चा ने स्थानीय राजनीतिक महत्व को और बढ़ा दिया है।
हालांकि, नगर पंचायत गठन या वर्तमान सरपंच को धारा 40 के तहत हटाने को लेकर अभी किसी अंतिम सरकारी निर्णय की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए फिलहाल इन बातों को राजनीतिक सूत्रों से सामने आ रही चर्चाओं के रूप में ही देखा जा रहा है।
दल बदल का ऑफर या नया सियासी दांव
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा वर्तमान सरपंच हरेंद्र चंद्राकर को लेकर है। सूत्रों के अनुसार, उनके सामने कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होने का विकल्प अथवा राजनीतिक प्रस्ताव रखे जाने की चर्चा है। यदि यह बातचीत किसी निष्कर्ष तक पहुंचती है तो कुंडा पंचायत में मौजूदा राजनीतिक समीकरणों में बड़ा बदलाव संभव है।
कुंडा की 20 वार्ड वाली पंचायत में सरपंच की कुर्सी महज एक प्रशासनिक पद नहीं, बल्कि स्थानीय राजनीति का महत्वपूर्ण केंद्र बन चुकी है। एक ओर न्यायालयीन प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, दूसरी ओर धारा 40 की कार्रवाई की चर्चाएं हैं और तीसरी ओर भाजपा समर्थित पंच को सरपंच बनाने तथा नगर पंचायत गठन की सुगबुगाहट।
अब नजर इस बात पर है कि प्रशासनिक प्रक्रिया पहले फैसला देती है या कुंडा की राजनीति उससे पहले अपना नया समीकरण तैयार कर लेती है। अंतिम तस्वीर सक्षम अधिकारी के निर्णय और शासन के आधिका