कवर्धा , विधायक कार्यालय में कवर्धा विधायक एवं प्रदेश के उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा से अपनी विभिन्न मांगों को लेकर भारतीय मजदूर संघ आगनबाड़ी कार्यकर्ता सहायिका ने मुलाकात की । छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा पिछले कई वर्षों में लंबित मागों व विभागीय कार्यो में हो रही समस्याओं को लेकर ज्ञापन पात्र धरना प्रदर्शन , रैली व अन्य कार्यक्रम के माध्यम से लगातार केन्द्र सरकार , राज्य सरकार को संघ के माध्यम से अवगत कराया जा रहा हैं , किंतु केन्द्र सरकार व राज्य सरकार कार्यकर्ताओं सहायिकाओं के प्रति विचार नहीं कर रहा है , सिर्फ काम में ही बढ़ोतरी कर रही है न केन्द्र सरकार , न ही राज्य सरकार हमारी समस्याओं पर कोई सार्थक विचार किया । जो कि कार्यकर्ता सहायिकाओं के लिए बहुत ही निराशाजनक है. जिससे चलते कार्यकर्ता – सहायिकाओ को गंभीर आर्थिक, मानसिक समस्याओं से जूझना पड़ रहा है. संघ पत्र के माध्यम से केन्द्र व राज्य सरकार से अनुरोध करती है कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता सहायिकाओं की मांगों पर जल्द से जल्द विचार कर हमारी मांगों को पूरा करने की मांग किए हैं ।
पूर्व में दे चुके है ज्ञापन
आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओ सहायिकाओं द्वारा 0 7 मार्च 2025 को छत्तीसगढ़ के जिलों में कलेक्टर के माध्यम से केंद्र व राज्य सरकार को ज्ञापन दिया जा चुका है, बावजूद इसके सरकार ने संघ के मांगो पर अबतक कोई विचार नहीं किया है न ही कोई बैठक आयोजित किया हैं । हाल ही में श्रमिक वर्ग के लिए श्रम मंत्रालय द्वारा न्यूनतम वेतन पर विचार कर बढ़ौतरी की गई. परंतु कार्यकतों सहायिका के लिए निश्चित पारिश्रमिक मानदेय पर कोई विचार नहीं की गई जबकि पिछले लबे समय से संघ की मांग है न्यूनतम वेतन सम्मानजनक मानदेय कार्यकर्ता सहायिका को दी जाए ताकि उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हो सके, पिछले कई वर्षों से न तो केन्द्र के बजट में, न राज्य के बजट में प्रावधान रखा जाता है कार्यकर्ता सहायिका के लिए, लेकिन काम के मामले में पिछले वर्षों पे नजर डाली जाए तो कई गुना बढ़ोतरी हो चुकी है ।
छः घंटे की जगह बारह घंटा लिया जाता हैं कार्य
ज्ञापन देने आई सोनिया मरावी ने बताया कि सरकार हमे ऑनलाइन काम तो दे दिया गया है लेकिन उसके लिए कोई प्रशिक्षण दिया नहीं है, न ही अच्छी स्टोरेज की मोबाइल फोन दी जा रही है आए दिन नए नए एप डाउनलोड कर उस पर कार्य करने की दिशा निर्देश आए दिन अधिकारीयों द्वारा व्हाट्स ग्रुप में 12 बजे रात तक दिया जा रहा है. कार्यकर्ता सहायिका किन किन परिस्थितियों में वो कार्य पूरी कर रहे है इस समस्या पर विचार नहीं किया जा रहा है. 6 घंटे के बजाय 10से 12 घंटे कार्य कराया जा रहा है. नेटवर्क समस्या को कार्यकर्ता सहायिका के मानदेय कटौती से जोड़ा जा रहा है जो बहुत ही दुखद विषय है. संघ वर्तमान सरकार से अनुरोध करती है की हमारी मांगों पर जल्द से जल्द विचार करे अन्यथा संगठन चरणबद्ध तरीके से आंदोलन करने पर बाध्य होगा।