जिले में वन विभाग के कर्मचारियों ने अधिकारियों के तानाशाही रवैये और नियम विरुद्ध कार्य आबंटन के विरोध में अनिश्चितकालीन हड़ताल की राह चुन ली है। वन कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों को जानबूझकर अन्य जिलों में कार्य आबंटित किया गया है, जो नियमों के विरुद्ध है और इसे कर्मचारियों की आवाज को दबाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
यह कार्य आबंटन ऐसे समय में किया गया है जब अग्नि सीजन और विधानसभा सत्र जारी है, साथ ही राज्य शासन द्वारा स्थानांतरण पर रोक लगाई गई है। इसके बावजूद आदेश जारी करना कर्मचारियों में भारी आक्रोश का कारण बना है। कर्मचारियों ने पहले वन मंडलाधिकारी कवर्धा और फिर मुख्य वन संरक्षक, दुर्ग से इस आदेश को निरस्त करने का अनुरोध किया, लेकिन जब कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तब आंदोलन का रास्ता अपनाया गया।
छत्तीसगढ़ वन कर्मचारी संघ, जिला कबीरधाम के सभी कर्मचारी 9 अप्रैल से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। इस हड़ताल में जिले के सभी रेंज अधिकारी, तहसील अध्यक्ष और अन्य मैदानी कर्मचारी शामिल हैं।
वन कर्मचारियों की नाराजगी के पीछे मुख्य कारण:
पहले से ही जिले में वन रक्षकों की भारी कमी
लंबित वनरक्षक भर्ती प्रक्रिया (2023-24)
डबल बीट की जिम्मेदारी निभा रहे बीटगार्ड
नियमों की अवहेलना कर मनमाना कार्य आबंटन
संघ पदाधिकारियों को निशाना बनाना
संघ के जिलाध्यक्ष परसराम चंद्राकर ने बताया कि यह आदेश सामान्य प्रशासन विभाग के दिशा-निर्देशों के विरुद्ध है और यह कर्मचारियों को मानसिक रूप से दबाने की मंशा से प्रेरित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कर्मचारी अपने कर्तव्यों के प्रति निष्ठावान हैं, परंतु नियम विरुद्ध आदेश किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
हड़ताल का संभावित असर:
जंगलों में आगजनी की घटनाओं में बढ़ोतरी की आशंका
तेंदूपत्ता खरीदी पर प्रभाव
अपराध नियंत्रण व गश्त पर असर
संघ ने चेतावनी दी है कि जब तक सभी कर्मचारियों का गलत तरीके से किया गया कार्य आबंटन निरस्त नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा। फिलहाल तीन कर्मचारियों का आदेश निरस्त किया गया है, लेकिन एक कर्मचारी का आदेश अभी भी लंबित है।