शराबबंदी और प्रदूषण नियंत्रण की मांग पर अडिग छत्तीसगढ़ संयुक्त किसान मोर्चा
महासमुंद, छत्तीसगढ़ की पवित्र धरती और विश्व धरोहर सिरपुर परिक्षेत्र को बचाने के लिए छत्तीसगढ़ संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले बीते तीन वर्षों से लगातार सत्याग्रह कर रहे किसानों का आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है।
किसानों ने गांव-गांव जाकर मुख्यमंत्री के सुशासन आवेदन अभियान के तहत अवैध करणी कृपा उद्योग के खिलाफ सैकड़ों शिकायतें दर्ज कराई हैं। किसानों की प्रमुख मांग है कि माननीय उच्च न्यायालय के आदेश का पालन करते हुए उक्त अवैध उद्योग को बंद किया जाए, जिससे क्षेत्रीय जनता को प्रदूषण, भूमि कब्जा और स्वास्थ्य समस्याओं से राहत मिल सके।
किसानों ने आरोप लगाया है कि यह उद्योग शासन की सिंचाई भूमि, नेशनल हाईवे की भूमि, आदिवासी भूमि तथा किसानों की निजी कृषि भूमि पर बलात कब्जा कर संचालन कर रहा है। इससे न केवल पर्यावरण दूषित हो रहा है, बल्कि खेत, खलिहान, तालाब, पीने का पानी, और पशुधन भी बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं ने बताया कि प्रदूषण के कारण चूल्हा-चौका चलाना तक मुश्किल हो गया है, बच्चों में बीमारियाँ बढ़ रही हैं, और बुजुर्गों को साँस व हृदय रोग जैसी गंभीर समस्याएं हो रही हैं।
किसानों की अन्य प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
1 . मुख्यमंत्री द्वारा तहसील कार्यालय तुमगांव में दर्ज प्रकरणों की शीघ्र सुनवाई
2. सशर्त डायवर्शन पर दर्ज सैकड़ों आपत्तियों का तत्काल निराकरण
3.28 फरवरी को आयोजित ट्रैक्टर रैली में किसानों की गिरफ्तारी व ट्रैक्टर जप्ती की जांच
4.नेशनल हाईवे भूमि पर अवैध कब्जे की शिकायत पर कार्रवाई
5.जिला प्रशासन व पुलिस प्रशासन में फैले भ्रष्टाचार के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई
इस आंदोलन में प्रमुख रूप से नंदकुमार साहू, बृजबिहारी साहू, अशोक कश्यप, कुंजलाल चेलक, टिकेलाल जलक्षत्री, संतोष यादव, इंदल पटेल, लीलाधर पटेल, वेदराम जांगड़े, डेविड चंद्राकर, लीलाबाई साहू सहित सैकड़ों किसानों और पंचायत प्रतिनिधियों ने भाग लिया है।
किसानों की यह चेतावनी है कि यदि शीघ्र ही कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और व्यापक स्तर पर ले जाया जाएगा।