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महिलाओं की आत्मनिर्भरता की राह में बाधा: सुनसान जगह पर बन रहा ‘महतारी सदन’ बना चिंता का विषय

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कवर्धा  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत महिलाओं को स्वावलंबी और आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ में ‘महतारी सदन’ का निर्माण किया जा रहा है। लेकिन कवर्धा ज़िले के पंडरिया विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत कुंडा में जिस स्थान पर इस भवन का निर्माण हो रहा है, उसने इसकी उपयोगिता और सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यह महतारी सदन कुंडा बस स्टैंड से लगभग 2 किलोमीटर दूर, एक सुनसान इलाके में बनाया जा रहा है। पास ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और छात्रावास भी हैं, लेकिन इसी इलाके में पहले बनाए गए राजीव सेवा केंद्र की दुर्दशा (कंडम स्थिति) इस बात का प्रमाण है कि बस्ती से दूर बनाए गए भवनों का उपयोग नहीं हो पा रहा है।
महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल
स्थानीय लोगो की माने तो यह क्षेत्र शाम ढलते ही पूरी तरह सुनसान हो जाता है। मदिरा सेवन करने वालों की जमघट यहां आम बात हो गई है, जिससे महिलाएं खुद को असुरक्षित महसूस करती हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि जिस भवन का उद्देश्य महिलाओं को सशक्त बनाना है, वो यदि उनके पहुंच से ही दूर हो और असुरक्षित भी हो, तो उसका क्या महत्व रह जाता है?
सरकारी योजना, लेकिन ज़मीनी सच्चाई उलटी
लगभग 25 लाख की लागत से 2500 वर्गफुट क्षेत्र में बनने वाला यह महतारी सदन आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित होगा—जिसमें हॉल, रसोईघर, स्टोर रूम, शौचालय और वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम जैसी व्यवस्थाएं होंगी। साथ ही सामुदायिक शौचालय और सुरक्षा के लिए बाउंड्रीवाल भी बनाई जाएगी। परंतु यदि भवन का स्थान ही गलत चुना गया है तो तमाम सुविधाएं भी व्यर्थ साबित होंगी।
स्थानीय मांग: रहवासी इलाके में हो निर्माण
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा महिलाओं के बैठने के स्थान की कमी की लगातार शिकायतों के बाद इस योजना की शुरुआत की गई थी। यदि यह भवन किसी रहवासी क्षेत्र में होता, तो न केवल इसकी पहुँच आसान होती, बल्कि महिलाएं बेझिझक इसका उपयोग कर पातीं। अब जब यह सुनसान इलाके में बन रहा है, तो यह एक और सरकारी भवन बनकर रह जाएगा जो कागजों में तो उपयोगी है लेकिन जमीन पर अनुपयोगी।
निष्कर्ष
महतारी सदन जैसी योजनाएं यदि ज़मीनी हकीकत को नज़रअंदाज़ कर बनाई जाएं, तो उद्देश्य से भटक जाती हैं। महिलाओं की सुरक्षा और उपयोगिता को ध्यान में रखकर ही ऐसे भवनों का निर्माण होना चाहिए, नहीं तो यह करोड़ों की सरकारी राशि और योजनाओं की गंभीरता दोनों पर सवाल खड़े करता है।

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