कवर्धा , सरदार वल्लभ भाई पटेल शक्कर कारखाना, बिसेसरा – जो किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण का एक महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता था – आज गन्ना उत्पादक किसानों के लिए निराशा और संघर्ष का प्रतीक बन गया है। 14 नवंबर 2024 से 19 फरवरी 2025 तक चले पेराई सत्र में 7659 किसानों ने 15140 ट्रैक्टर गन्ना कारखाने को बेचे, जिसका कुल वजन 15,01,534.19 क्विंटल रहा। प्रति क्विंटल 315.10 रुपये की दर से यह कुल 47.31 करोड़ रुपये का गन्ना हुआ।

लेकिन इस बड़ी राशि में से अब तक सिर्फ 2.16 करोड़ रुपये का भुगतान ही हुआ है, जो कि मात्र 1278 किसानों को दो किस्तों में 5 दिसंबर 2024 तक मिला। बाकी के लगभग 39.45 करोड़ रुपये का भुगतान अब भी अटका हुआ है, और इसकी मार किसानों पर सीधी पड़ी है।
किसानों की टूटी रीढ़
जब किसान खेती के लिए बीज, खाद और अन्य संसाधनों की खरीदी करते हैं, उन्हें पैसों की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। लेकिन भुगतान न होने के कारण कई किसान बैंकों के डिफॉल्टर हो गए हैं। बच्चों की पढ़ाई, शादी-ब्याह और घर-परिवार के खर्च में भारी दिक्कतें सामने आ रही हैं।
गुड़ उद्योग की ओर रुख
शक्कर कारखाने में न केवल कम दर (315.10 रु./क्विंटल) बल्कि भुगतान में देरी ने किसानों को मजबूर कर दिया कि वे अपने गन्ने को गुड़ उद्योग में 500 रु./क्विंटल तक की दर पर बेचें, जहां नगदी भुगतान मिलता है। इसी कारण कारखाने को पर्याप्त गन्ना नहीं मिला और फरवरी में ही उसे बंद करना पड़ा।
कारखाने की अंदरूनी दुर्दशा
कारखाने की हालत सुधारने की जिम्मेदारी जिन अफसरों पर थी, वहीं कथित तौर पर जमकर लूट में लगे रहे। जरूरत से ज्यादा कर्मचारियों की भर्ती और वित्तीय कुप्रबंधन ने कारखाने को घाटे की ओर धकेल दिया।




