कबीरधाम जिले के लोहारा वन परिक्षेत्र में पदस्थ रेंजर अनुराग वर्मा पर एक महिला दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी ने गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़िता ने आरोप लगाया कि वर्मा ने बार-बार मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया, और जब उसने दबाव के आगे झुकने से इनकार किया, तो उस पर झूठे आरोप लगाकर वेतन रोक दिया गया तथा नौकरी से बाहर कर दिया गया।
महिला कर्मचारी ने बताया कि वह अपनी बीमार मां के साथ रहती है और पूर्व वन मंत्री की अनुशंसा पर उसे दैनिक वेतन पर नियुक्त किया गया था। शुरुआत में कार्य संतोषजनक था, लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद रेंजर का व्यवहार बदल गया। आरोप है कि रेंजर ने अपने प्रभाव और पद का दुरुपयोग करते हुए महिला को अपने अधीन करने के प्रयास किए, और असफल रहने पर झूठे आरोपों के तहत मानसिक प्रताड़ना देना शुरू किया।
पीड़िता का कहना है कि उसने जिला वन अधिकारी, संभागीय वन अधिकारी, विधायक व मंत्री तक शिकायत पहुंचाई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। अंततः उसने पुलिस अधीक्षक कबीरधाम को भी शिकायत सौंपी, लेकिन वहां भी ‘सबूत’ की मांग कर टाल दिया गया।
पीड़िता ने सवाल उठाया है कि अकेले ऑफिस में हुए उत्पीड़न का साक्ष्य वह कैसे प्रस्तुत करे और अन्य कर्मचारी रेंजर के दबाव में उसके समर्थन में क्यों सामने नहीं आ रहे।
उक्त संबंध में रेंजर अनुराग वर्मा से उनका पक्ष जानने के लिए उनके मोबाइल नंबर 9981367779 पर कॉल और मैसेज किया गया, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया।
यह मामला शासन-प्रशासन की संवेदनशीलता और महिला कर्मियों की कार्यस्थल पर सुरक्षा को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। अब देखना होगा कि क्या इस ‘जंगल राज’ के आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी या मामला फिर से फाइलों में दबा दिया जाएगा।




