छत्तीसगढ़ के विश्वविख्यात भोरमदेव वन्यजीव अभ्यारण्य से जुड़ा एक चौंकाने वाला भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। कबीरधाम जिले के जामुनपानी सर्किल में पदस्थ वनपाल हनुमान दास मानिकपुरी, जो इसी माह सेवा निवृत्त होने वाले हैं, पर शासकीय राशि के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं।
शिकायत के अनुसार, आदिवासी और जनजातीय लाभार्थियों को वन विभाग की योजनाओं के अंतर्गत जो राशि दी जानी थी, उसे वनपाल ने अपने पुत्र महेश दास और बहू सरस्वती बाई के खातों में ट्रांसफर कराया। सरस्वती बाई के खाता संख्या xxxxxx8431 (बैंक ऑफ बड़ौदा, उड़िया शाखा) में केवल वन विभाग की ही राशि जमा हुई है, जो यह दर्शाता है कि यह खाता इस घोटाले के उद्देश्य से खोला गया। वहीं, महेश दास के खाते xxxxxx8433 में भी शासकीय भुगतान दर्ज है।
वन्यजीवों की शरणस्थली माने जाने वाले भोरमदेव अभ्यारण्य में इस प्रकार की वित्तीय अनियमितता केवल आर्थिक अपराध नहीं, बल्कि पारिस्थितिक संतुलन और वन्यजीव संरक्षण के प्रति शासन की गंभीरता पर भी सवाल खड़े करती है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि हनुमान दास मानिकपुरी इस माह सेवानिवृत्त होने वाले हैं, जिससे आशंका है कि यह सारा घोटाला सेवा निवृत्ति से पहले जल्दबाजी में किया गया है, ताकि बाद में किसी प्रकार की जवाबदेही से बचा जा सके।
शिकायतकर्ता द्वारा 14 मई 2025 को जिला कलेक्टर , वन मंडल अधिकारी को शिकायती पत्र सौंपा गया था और निवेदन किया था कि यदि एक सप्ताह में कार्यवाही नहीं हुई तो एंटी करप्शन ब्यूरो रायपुर सहित वन विभाग के उच्चाधिकारियों को इसकी शिकायत की जाएगी। आज दिनांक तक कोई कार्रवाई नहीं होने से प्रशासन की निष्क्रियता भी सवालों के घेरे में है।
अब समय की मांग है कि हनुमान दास मानिकपुरी को सेवा निवृत्त होने से पूर्व ही तत्काल निलंबित कर उनके विरुद्ध स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच शुरू की जाए, ताकि सरकारी धन की वसूली सुनिश्चित हो और भविष्य में ऐसे कृत्य करने वालों को कड़ा संदेश मिले।