कानून-व्यवस्था की रक्षा करने वाली पुलिस अब शिक्षा की मशाल थामे समाज में बदलाव की कहानी भी लिख रही है। छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में पुलिस प्रशासन ने एक अनुकरणीय पहल करते हुए वनांचल क्षेत्रों के शिक्षा से वंचित युवाओं के लिए ओपन स्कूल परीक्षा की राह आसान की। परिणामस्वरूप 50 से अधिक युवाओं ने सफलता अर्जित की है। यह सिर्फ एक परीक्षा में उत्तीर्ण होने की कहानी नहीं, बल्कि अंधेरे में रोशनी की किरण तलाशते युवाओं की उम्मीदों की उड़ान है।
पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह (आईपीएस) के नेतृत्व में तथा एएसपी पुष्पेंद्र बघेल, पंकज पटेल और डीएसपी संजय ध्रुव के मार्गदर्शन में यह प्रयास शिक्षा से कटे वनांचल युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में मील का पत्थर साबित हुआ है।
तीन सौ युवाओं का चयन, पूर्ण सहयोग
इस अभियान के अंतर्गत ऐसे 300 युवाओं का चयन किया गया, जिन्होंने किसी न किसी कारण से शिक्षा अधूरी छोड़ दी थी। पुलिस ने इन छात्रों के ओपन स्कूल परीक्षा फॉर्म भरवाने, निःशुल्क शैक्षणिक सामग्री देने और परीक्षा केंद्र तक पहुँचने हेतु वाहन की व्यवस्था कर एक पूर्ण सहयोग तंत्र स्थापित किया। विशेष शाखा के अधिकारी जैसे प्रधान आरक्षक घनाराम सिन्हा, अभिजीत सिंह, कृपाराम मेरीवीं, रायसिंह धुर्वे, नव करन हेमला और लिबरु उर्फ दिवाकर ने इस अभियान में उल्लेखनीय योगदान दिया।
शिक्षा: बदलाव की बुनियाद
शिक्षा केवल रोजगार का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता, जागरूकता और सामाजिक सशक्तिकरण का मूल आधार है। इस अभियान से जुड़कर कई युवा न केवल पढ़ाई में वापस लौटे, बल्कि उनमें आत्मविश्वास और भविष्य के लिए आशा भी जागृत हुई। वहीं, जिन छात्रों का परिणाम अपेक्षित नहीं रहा, उन्हें आगामी पूरक परीक्षा की विशेष तैयारी के लिए मार्गदर्शन दिया जा रहा है।
समाज और पुलिस का साझा सपना
एसपी धर्मेंद्र सिंह ने कहा, “पुलिस केवल कानून व्यवस्था तक सीमित नहीं रह सकती। हमारा कर्तव्य है कि हम समाज के हर वर्ग को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाएं।”
कबीरधाम पुलिस की यह पहल अब एक शिक्षा अभियान से आगे बढ़कर सामाजिक आंदोलन का रूप ले चुकी है। यह सिद्ध करता है कि यदि समर्पण हो और मार्गदर्शन मिले, तो शिक्षा की शक्ति से सबसे पिछड़े क्षेत्र के युवा भी तरक्की की नई इबारत लिख सकते हैं।
इस तरह की पहलें यह साबित करती हैं कि शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बदलाव का सबसे मजबूत औजार है। और जब इसे थामे होते हैं वर्दीधारी रक्षक, तब समाज में एक नई क्रांति का जन्म होता है।