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पांडातराई में सरकारी शराब दुकान के इर्द-गिर्द अवैध चखना बाजार का बोलबाला, प्रशासन मौन

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 युवाओं को नशे की ओर धकेल रही अव्यवस्था, आंदोलन की चेतावनी 
पांडातराई। नगर पंचायत पांडातराई में स्थित सरकारी मदिरा दुकान के आसपास अवैध चखना दुकानों की बेतहाशा बढ़ोत्तरी न केवल सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुँचा रही है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था व जनस्वास्थ्य पर भी गंभीर खतरा बनती जा रही है। प्रशासन की आंखों के सामने फल-फूल रहे इन अस्थायी ठिकानों से आम नागरिकों में आक्रोश गहराता जा रहा है।
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि जैसे ही शराब दुकान खुलती है, आसपास दर्जनों अस्थायी चखना सेंटर बिना किसी वैध अनुमति के सक्रिय हो जाते हैं। इन दुकानों में खुलेआम मांस, मछली, अंडा और अन्य खाद्य पदार्थ बेचे जाते हैं, जिनका न तो स्वास्थ्य विभाग से निरीक्षण होता है, न ही नगर पंचायत से कोई स्वीकृति प्राप्त है। इससे खाद्य जनित बीमारियों का खतरा भी मंडरा रहा है।
करोड़ों की राजस्व हानि और युवाओं का भविष्य अधर में
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन अवैध दुकानों पर नियमन लागू किया जाए और इन्हें कर के दायरे में लाया जाए, तो राज्य सरकार को लाखों नहीं बल्कि करोड़ों रुपये का वार्षिक राजस्व प्राप्त हो सकता है। वर्तमान में यह पूरा कारोबार बिना किसी नियंत्रण के चल रहा है, जिससे सरकारी खजाने को सीधी हानि हो रही है।
साथ ही, क्षेत्र में बढ़ते नशाखोरी के मामलों ने भी चिंता बढ़ा दी है। स्कूली छात्र और बेरोजगार युवा इन अड्डों की ओर आकर्षित हो रहे हैं, जिससे उनका मानसिक, शैक्षणिक और सामाजिक पतन तेज़ी से हो रहा है।
आबकारी और नगर प्रशासन की भूमिका संदिग्ध
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आबकारी विभाग और स्थानीय प्रशासन को इन गतिविधियों की पूरी जानकारी होने के बावजूद अब तक किसी भी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। क्षेत्रीय नागरिकों का आरोप है कि प्रशासनिक मिलीभगत और लापरवाही के चलते यह गोरखधंधा वर्षो से बिना रोकटोक के संचालित हो रहा है।
कार्रवाई नहीं तो होगा जन आंदोलन
व्यापार मंडल, युवा मोर्चा और महिला समितियों सहित कई सामाजिक संगठनों ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए मांग की है कि इन अवैध दुकानों को तत्काल हटाया जाए और दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही, मदिरा दुकानों के आसपास स्वच्छता, सुरक्षा और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए नियमित पुलिस गश्त की भी मांग की गई है।
यदि शीघ्र कोई कदम नहीं उठाया गया तो स्थानीय नागरिकों ने जन आंदोलन, चक्काजाम और प्रशासनिक घेराव जैसे कदम उठाने की चेतावनी दी है

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