पुलिसिया भ्रष्टाचार का एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें थाना प्रभारी सहित तीन पुलिसकर्मियों को रिश्वतखोरी और झूठे केस में फंसाने के आरोपों के चलते लाइन अटैच कर दिया गया है। यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक के आदेश पर की गई।
झूठे केस में फंसाकर की गई अवैध वसूली
ग्राम घरघोड़ी निवासी भूपदेव सिंह राठिया ने एसपी कार्यालय रायगढ़ में शिकायत दर्ज कराई थी कि थाना प्रभारी हर्षवर्धन सिंह बैस, आरक्षक दिलीप साहू और प्रेम राठिया ने महुआ शराब बनाने के झूठे केस में फंसाने की धमकी देकर पैसों की मांग की।
जांच में खुला भ्रष्टाचार का सच
मामले की जांच उप पुलिस अधीक्षक (सायबर) को सौंपी गई थी। जांच रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से पाया गया कि संबंधित पुलिसकर्मियों ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए भ्रष्ट और अनैतिक आचरण किया।
तीनों पुलिसकर्मी लाइन हाजिर, तीन दिन में जांच के आदेश
एसपी रायगढ़ ने कार्रवाई करते हुए तीनों पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से रक्षित केंद्र रायगढ़ में अटैच कर दिया है और मामले की प्राथमिक जांच तीन दिनों के भीतर पूरी करने के निर्देश दिए हैं।
लाइन अटैच किए गए पुलिसकर्मी
निरीक्षक हर्षवर्धन सिंह बैस (थाना प्रभारी, घरघोड़ा)
आरक्षक दिलीप साहू
आरक्षक प्रेम राठिया
पुलिस-माफिया गठजोड़ पर उठे सवाल
इस कार्रवाई से पुलिस विभाग में हड़कंप मचा है, वहीं ग्रामीण इलाकों में यह संदेश गया है कि अब भ्रष्टाचार और दमन के खिलाफ आवाज उठाना निस्फल नहीं है।
जनता यह भी पूछ रही है कि क्या यह मामला पुलिस और शराब माफिया के बीच व्यापक गठजोड़ की केवल एक कड़ी है। क्या ग्रामीणों और आदिवासियों को लंबे समय से इसी तरह झूठे केसों में फंसाकर वसूली की जा रही है ।