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टूट गई विकास की सड़क! छीतापार ग्राम पंचायत की सीसी रोड बदहाल, दरारों-गड्ढों से परेशान ग्रामीणों ने उठाई जांच और कार्रवाई की मांग

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कवर्धा , विकास की योजनाएं जब भ्रष्टाचार और लापरवाही की भेंट चढ़ जाती हैं, तो नतीजा छीतापार ग्राम पंचायत जैसी दुर्दशा के रूप में सामने आता है। जनपद पंचायत पंडरिया के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत छीतापार में दस माह पूर्व बनी सीसी रोड आज पूरी तरह से बदहाल हो चुकी है। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण की शुरुआत से ही गुणवत्ता से समझौता किया गया था और आज उसका परिणाम जगह-जगह पड़ी मोटी दरारों और गहरे गड्ढों के रूप में दिखाई दे रहा है।
दरारों में फंसते पहिए, गिरते लोग
सड़क पर मोटरसाइकिल और साइकिल सवारों के लिए चलना किसी जोखिम से कम नहीं है। दरारों में फंसकर आए दिन लोग गिर रहे हैं और कई बार गंभीर चोटें भी लग चुकी हैं। सड़क के किनारे सोल्डर न होने के कारण बरसात के दिनों में कीचड़ और फिसलन से परेशानी और बढ़ जाती है।
निर्माण में अनियमितताएं
ग्रामीणों और स्थानीय सूत्रों के अनुसार, सड़क निर्माण में स्थानीय हाफ नदी की रेत का उपयोग किया गया, जबकि नियमानुसार गुणवत्ता वाली प्रोसेस्ड रेत का प्रयोग होना चाहिए था। साथ ही मुरूम की परत ठीक से नहीं डाली गई और सामग्री का अनुपात भी निर्धारित प्रकलन के अनुसार नहीं रखा गया।
 घर बैठे किया गया मूल्यांकन
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि  ग्राम पंचायत छीतापार में सोसायटी तक जाने के लगभग दो सौ मीटर बनाया गया सी सी रोड में तकनीकी अधिकारियों द्वारा स्थल निरीक्षण के नाम पर औपचारिकता निभाई गई और निर्माण के मूल्यांकन में भारी गड़बड़ी हुई। कुछ लोगों ने तो यह तक कहा कि ‘घर बैठे’ मूल्यांकन, सत्यापन कर रिपोर्ट बना दी गई, जिससे गुणवत्ता की पोल कुछ ही महीनों में खुल गई।
जांच समिति की आवश्यकता 
ग्रामीणों ने मांग की है कि एक स्वतंत्र जांच समिति गठित कर इस निर्माण कार्य की पूरी जांच करवाई जाए। दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों, निर्माण एजेंसी और अन्य जिम्मेदारों से राशि की वसूली की जाए और उनके विरुद्ध कानूनी कार्यवाही की जाए।
नागरिक सूचना पटल भी नदारद
पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए लगाए जाने वाला नागरिक सूचना पटल (साइट बोर्ड) तक मौके से नदारद है, जिससे संदेह और भी गहराता है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि सूचना पटल लगा होता तो निर्माण की लागत, निर्माण एजेंसी और कार्यावधि की जानकारी सार्वजनिक होती, जिससे जवाबदेही तय करना आसान होता।
प्रशासन मौन, ग्रामीणों में रोष
जहाँ एक ओर ग्रामीणों को रोजमर्रा की आवाजाही में भारी परेशानी हो रही है, वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक स्तर पर उदासीनता से लोगों में गहरा आक्रोश है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र मरम्मत कार्य और जांच शुरू नहीं की गई, तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

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