पंडरिया नगर का ऐतिहासिक और श्रद्धा का केंद्र रहा जोंरा मंदिर आज पुनः अपने वैभव की ओर अग्रसर है। जोंरा मंदिर जीर्णोद्धार समिति के सतत प्रयासों और नगरवासियों के सहयोग से मंदिर निर्माण कार्य पूर्णता की ओर बढ़ रहा है।
इसी क्रम में आज मंदिर परिसर में जल सुविधा की व्यवस्था को लेकर एक सराहनीय पहल की गई। नगर के प्रतिष्ठित बोरवेल संचालक ईश्वर जायसवाल ने अपने पिता स्वर्गीय श्री विशंभर लाल जी एवं माता श्रीमती मूँगेलहीन देवी जी की स्मृति में मंदिर परिसर में निःशुल्क बोर करवाने की घोषणा की। इस योगदान की मंदिर समिति एवं समस्त नगरवासी हार्दिक अनुमोदना करते हैं। सभी ने इस पुनीत कार्य के लिए जायसवाल परिवार को धन्यवाद ज्ञापित किया और प्रभु महादेव एवं बजरंग बली की कृपा सदैव उन पर बनी रहने की कामना की।
इतिहास और धार्मिक आस्था का प्रतीक
पंडरिया नगर का यह मंदिर सदियों पुराना है। कहा जाता है कि यह मंदिर संतों और साधुओं के विश्राम स्थल के रूप में प्रसिद्ध था। पुराने समय में हाथियों के साथ यात्रा करते साधु-संत यहाँ रुकते थे और कई दिनों तक मंदिर परिसर में भंडारा का प्रसाद ग्रहण करते थे। मंदिर में कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर झूला उत्सव का आयोजन नगर में विशेष आस्था और श्रद्धा के साथ किया जाता रहा है।
समाज का सहयोग बना प्रेरणा:
मंदिर की प्राचीनता और आस्था को ध्यान में रखते हुए सम्पूर्ण नगरवासियों और आसपास के श्रद्धालुओं ने अपने सामर्थ्यानुसार दान और श्रमदान के माध्यम से जीर्णोद्धार में भागीदारी निभाई है। हर वर्ग और आयु के लोग इस पुनर्निर्माण कार्य को अपना धार्मिक कर्तव्य मानकर सहयोग कर रहे हैं।
यह मंदिर न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि यह नगर की सांस्कृतिक पहचान भी है। आने वाले समय में यह नवनिर्मित मंदिर परिसर न केवल श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बनेगा, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों को हमारी संस्कृति और इतिहास से जोड़ने वाला सेतु भी सिद्ध होगा।