जिले में अवैध सूदखोरी के खिलाफ कबीरधाम पुलिस ने एक और सख्त कदम उठाया है। पिपरिया थाना क्षेत्र के एक सरकारी शिक्षक को अवैध ब्याजखोरी और ब्लैकमेलिंग से राहत दिलाते हुए महिला सूदखोर के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता और छत्तीसगढ़ ऋणियों का संरक्षण अधिनियम 1937 के तहत आपराधिक प्रकरण दर्ज किया गया है।
मामले की गंभीरता: शिक्षक राधेलाल डहरिया ने पुलिस को दिए आवेदन में बताया कि उन्होंने वर्ष 2018 में घरेलू आवश्यकता हेतु झलमला निवासी शकुन उर्फ सतनाम खुराना से ₹4 लाख उधार लिए थे, जिस पर 10% मासिक ब्याज की शर्त लगाई गई। धीरे-धीरे यह कर्ज 40 लाख तक पहुँच गया। आरोप है कि शकुन खुराना एवं उसके पति द्वारा धमकी, गाली-गलौज, अपमान और ब्लैंक चेक के माध्यम से मानसिक व आर्थिक शोषण किया गया।
पुलिस की तत्परता: मामले में अपराध क्रमांक 175/2025 के तहत धारा 294, 351(2), 308(2) BNS एवं छत्तीसगढ़ ऋणियों का संरक्षण अधिनियम 1937 की धारा 4 के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया। पुलिस अधीक्षक धर्मेन्द्र सिंह के निर्देशन में और वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में त्वरित कार्रवाई प्रारंभ की गई है।
कानूनी समझ
छत्तीसगढ़ ऋणियों का संरक्षण अधिनियम, 1937 के तहत अवैध रूप से ब्याज वसूलना दंडनीय अपराध है।
भारतीय न्याय संहिता (BNS) की नई धाराएं सामाजिक और आर्थिक शोषण को रोकने हेतु प्रभावी कार्रवाई का प्रावधान करती हैं।
पुलिस की अपील
अवैध सूदखोरों से कोई भी वित्तीय लेनदेन न करें।
कोरे हस्ताक्षरित चेक कभी किसी को न दें।
जरूरत पड़ने पर केवल अधिकृत बैंकों या सहकारी संस्थाओं से ही ऋण लें।
यदि कोई व्यक्ति सूदखोरी, धमकी या आर्थिक शोषण का शिकार हो रहा है, तो तुरंत थाना या कंट्रोल रूम से संपर्क करें।
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