प्रधानमंत्री बीमा योजना के तहत बीमित एक व्यक्ति की मृत्यु के बाद दावा खारिज किए जाने के मामले में जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग बलौदाबाजार ने बीमा कंपनी के खिलाफ महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। आयोग ने बीमा कंपनी को मृतक के परिजन को 2 लाख रुपये की बीमा राशि, ब्याज सहित क्षतिपूर्ति व वाद व्यय मिलाकर कुल राशि का भुगतान करने का आदेश पारित किया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आवेदक ईश्वरी प्रसाद साहू के पुत्र टिकेश्वर प्रसाद साहू का एक बैंक में बचत खाता था, जिसमें प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के अंतर्गत केवल 12 रुपये के वार्षिक प्रीमियम पर 2 लाख रुपये का बीमा कराया गया था। दुर्भाग्यवश, टिकेश्वर प्रसाद की मृत्यु तालाब में डूबने से हो गई।
परिजनों द्वारा बीमा दावा प्रस्तुत करने पर बीमा कंपनी — ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, रायपुर — ने दावा यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि मृत्यु मिरगी का दौरा पड़ने के कारण हुई है, जो बीमा योजना के दायरे में नहीं आता।
इस निर्णय के खिलाफ मृतक के पिता ने जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज की। आयोग के अध्यक्ष छमेश्वर लाल पटेल, सदस्य हरजीत सिंह चावल एवं शारदा सोनी की पीठ ने विस्तृत सुनवाई के बाद पाया कि मृतक को मिरगी की बीमारी थी, इसका कोई प्रमाण घटना के समय उपलब्ध नहीं है। चिकित्सकीय रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के अनुसार मृत्यु पानी में डूबने से हुई थी, जो एक दुर्घटनाजन्य मृत्यु है।
आयोग ने बीमा कंपनी को अनुचित व्यापार व्यवहार एवं सेवा में कमी का दोषी ठहराते हुए मृतक के परिजन को बीमा राशि 2,00,000 रुपये, 6% वार्षिक ब्याज (आवेदन तिथि से आदेश तिथि तक), मानसिक व आर्थिक क्षति के लिए 10,000 रुपये तथा वाद व्यय के रूप में 2,000 रुपये, कुल 2,12,000 रुपये से अधिक की राशि 45 दिन के भीतर अदा करने का आदेश दिया। निर्धारित समयसीमा में भुगतान न करने की स्थिति में 9% वार्षिक ब्याज की भी व्यवस्था की गई है।
यह फैसला न केवल बीमित नागरिकों के अधिकारों की रक्षा में मील का पत्थर है, बल्कि बीमा कंपनियों को भी समय पर व न्यायोचित दावों के निपटान के प्रति सतर्क रहने का स्पष्ट संकेत है।



