विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर बाल अधिकार संगठन छत्तीसगढ़ के तत्वावधान में *पी.जी. कॉलेज ऑडिटोरियम, कवर्धा* में **जिला स्तरीय कार्यशाला** का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में **डॉ. वर्णिका शर्मा**, अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग, छत्तीसगढ़ शासन की गरिमामय उपस्थिति रही।
कार्यशाला का उद्देश्य बाल श्रम के खिलाफ जन-जागरूकता फैलाना, बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा सभी संबंधित विभागों, संस्थाओं एवं समाज के प्रतिनिधियों को एक मंच पर लाकर साझा रणनीति बनाना था।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और राज्य गीत से हुई। मुख्य अतिथि डॉ. वर्णिका शर्मा ने अपने उद्बोधन में बाल श्रम की सामाजिक, आर्थिक और नैतिक जटिलताओं पर प्रकाश डालते हुए कहा:
12 जून का है नारा, बाल मजदूरी नहीं दुबारा।।
“बाल श्रम बच्चों के भविष्य को अंधकार में धकेलता है। इसकी रोकथाम केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि सामाजिक दायित्व भी है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी बच्चा शिक्षा और सुरक्षित बचपन से वंचित न हो।”
कार्यशाला में विभिन्न वक्ताओं जिसमें अशोक चंद्रवंशी सामाजिक कार्यकर्ता, चंद्रप्रकाश चंद्रवंशी अध्यक्ष नगर पालिक परिषद कवर्धा, रूपेश जैन जिला मुख्य आयुक्त स्काउट एवं गाइड, गजराज सिंह निज सहायक सांसद राजनांदगांव लोकसभा क्षेत्र, मोती बैगा, बिहारी बैगा एवं चंद्रकांत यादव ने बाल श्रम की वर्तमान स्थिति, कानूनों की जानकारी, पुनर्वास की प्रक्रिया और समाज की भूमिका जैसे विषयों पर विस्तृत प्रस्तुतियाँ दीं। जिला स्तर के अधिकारियों, शिक्षकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, स्वयंसेवी संस्थाओं एवं छात्र-छात्राओं ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।
कार्यशाला के पूर्व नवीन विश्राम गृह में आयोग के अध्यक्ष का श्रीमती सुषमा गणपत बघेल अध्यक्ष जनपद पंचायत कवर्धा के नेतृत्व में किरण यादव ग्राम अतरिया खुर्द की महिला समूहों एवं रमन सिंह, चंद्रकांत यादव संगठन पदाधिकारियों द्वारा भव्य स्वागत किया गया।
विशेष रूप से बाल श्रम एवं नशा मुक्ति के लिए बच्चों की प्रेरक रंगोली एवं चित्रकला ने उपस्थित अतिथियों एवं प्रतिभागियों को गहराई से प्रभावित किया। पालेश यादव की सांस्कृतिक प्रस्तुति और विशेष संरक्षित जनजाति बैगा समुदाय की बैगा नृत्य ने कार्यक्रम को जीवंत बना दिया।






