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मनरेगा में लापरवाही की मिसाल: कबीरधाम में बालश्रम, घटिया निर्माण, पहाड़ी पर सड़क निर्माण

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कवर्धा
कबीरधाम जिले के वनांचल क्षेत्र ग्राम पंचायत आमानारा (जनपद पंचायत बोड़ला) में आई ए पी योजना एवं मनरेगा के संयुक्त वित्तपोषण से गाड़ाघाट से देवगांव (मध्यप्रदेश सीमा) तक 1.50 किमी की डब्ल्यूबीएम सड़क निर्माण किया जा रहा है। यह कार्य अब नियमों के खुले उल्लंघन, निर्माण की घटिया गुणवत्ता और तकनीकी लापरवाही के चलते विवादों के केंद्र में है। उक्त निर्माण कार्य की स्वीकृति दिनांक 8 जून 2023 को हुई थी। इसमें पांच लाख रुपए की राशि आई ए पी मद से और ₹6,19,000 की राशि मनरेगा मद से स्वीकृत की गई है। कुल मिलाकर यह ₹11,19,000 की योजना अब जन निगरानी, पारदर्शिता और प्रशासनिक प्रतिबद्धता के बड़े सवाल खड़े कर रही है।

बालश्रम का स्पष्ट उल्लंघन
योजना में ₹1,16,000 मजदूरी मद की स्वीकृति के विरुद्ध अब तक ₹56,000 का ही भुगतान हुआ है। मौजूदा जारी मस्टररोल में 25 मजदूर दर्ज हैं, लेकिन स्थल पर मात्र 18 मजदूर ही कार्य करते पाए गए, जिनमें से 2 नाबालिग बालिकाएं — जो कन्या छात्रावास अमेरा में अध्ययनरत हैं कार्यरत मिलीं।
यह सीधे-सीधे बालश्रम (प्रतिषेध और विनियमन) अधिनियम, 1986 और महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के गाइडलाइन की धारा 3(1) का उल्लंघन है, जिसमें 18 वर्ष से कम आयु के व्यक्ति को श्रमिक के रूप में नियोजित करना अपराध है।
गलत स्थल चयन में गड़बड़ी
निर्माणाधीन डब्ल्यू बी एम सड़क 1.5 किमी लंबी ऊँची पहाड़ी ढलान पर बनाई जा रही है, जो न तो टिकाऊ है और न ही व्यावहारिक। बरसात में इसके बह जाने की आशंका प्रबल है। यह स्थिति महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना परिशिष्ट-I के बिंदु 4.3 का उल्लंघन है, जिसमें “स्थायी और उपयोगी परिसंपत्तियों के निर्माण” की बात स्पष्ट की गई है।
घटिया निर्माण सामग्री और तकनीकी पर्यवेक्षण की कमी
निर्माण कार्य पर मिक्स गिट्टी का उपयोग किया जा रहा है जिसे डोजर (ट्रैक्टर) से बिछाया गया है। परिणामस्वरूप कई जगह गिट्टी बह चुकी है या पूरी तरह से गायब है। मुरूम की मात्रा न्यूनतम है और मज़दूर स्थानीय पहाड़ी मिट्टी से भराव कर रहे हैं, जो निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
कार्य स्थल पर न तो ‘नागरिक सूचना पटल’ लगाया गया है, न ही कोई तकनीकी सहायक अब तक स्थल पर पहुंचा है, जो कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना नियमावली के अनुसार अनिवार्य है।
यह योजना प्रशासनिक लापरवाही, तकनीकी चूक, पारदर्शिता की कमी और कानून उल्लंघन का साक्षात उदाहरण बन गई है। बालश्रम, स्थल चयन, सूचना पटल की अनुपस्थिति और घटिया सामग्री जैसे तत्व महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना और आई ए पी दोनों योजनाओं की गरिमा और उद्देश्य पर सवाल खड़े करते हैं।
यदि तत्काल जांच नहीं की जाती, तो यह मामला वित्तीय और नैतिक भ्रष्टाचार की दिशा में अग्रसर हो सकता है।

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