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कबीरधाम में खाद-बीज संकट पर किसानों का फूटा आक्रोश, दो स्थानों पर चक्काजाम – प्रशासनिक लापरवाही और कालाबाजारी के खिलाफ उग्र प्रदर्शन

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खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में खाद और बीज की भारी किल्लत किसानों के लिए संकट का कारण बन गई है। डीएपी और यूरिया जैसे आवश्यक उर्वरकों की कमी और वितरण में अनियमितता को लेकर शनिवार को जिले के दो प्रमुख क्षेत्रों – पंडरिया और तेलीटोला में किसानों ने चक्काजाम कर उग्र प्रदर्शन किया।
पंडरिया: कालाबाजारी के खिलाफ किसान उतरे सड़कों पर
शनिवार सुबह सैकड़ों किसान पंडरिया-कवर्धा मुख्य मार्ग पर जमा हुए और सहकारी समितियों में खाद होते हुए भी वितरण न होने पर नाराजगी जताई। किसानों का आरोप था कि सरकारी समितियों में उर्वरक का भंडारण है, लेकिन जानबूझकर रोककर रखा गया है, जबकि निजी दुकानों में कालाबाजारी चरम पर है — मनमाने दाम वसूले जा रहे हैं।
कई घंटे तक मुख्य मार्ग पूरी तरह ठप रहा, वाहनों की लंबी कतारें लगीं। हालात को देखते हुए कृषि विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और बातचीत कर किसानों को शांत करने की कोशिश की।
तेलीटोला (सहसपुर लोहारा): सहकारी समिति के खिलाफ बड़ा विरोध
इसी दिन सहसपुर लोहारा क्षेत्र के ग्राम तेलीटोला में भी किसानों ने चक्काजाम किया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि आदिम जाति सेवा सहकारी समिति जुनवानी में पर्याप्त खाद होते हुए भी प्रबंधक और समिति अध्यक्ष की मनमानी के कारण उन्हें खाद नहीं मिल रही है।
करीब 1500 किसान प्रभावित हैं, और उन्होंने सहसपुर लोहारा–रेंगाखार मार्ग को अवरुद्ध कर दिया। आपात सेवाओं को छोड़ किसी भी वाहन को रास्ता नहीं दिया गया। किसानों ने समिति में पारदर्शिता लाने और दोषियों को हटाने की मांग की।
कृषि संकट की गहराती तस्वीर
यह विरोध कबीरधाम जिले के किसानों की बदहाल स्थिति और प्रशासनिक तंत्र की विफलता को उजागर करता है। खरीफ सीजन में जब एक-एक दिन महत्वपूर्ण होता है, ऐसे में खाद-बीज की अनुपलब्धता कृषि उत्पादन और किसान आत्मनिर्भरता को गहरा आघात पहुंचा सकती है।
किसानों ने चेतावनी दी है कि अगर तत्काल प्रभाव से कालाबाजारी पर रोक, पारदर्शी वितरण व्यवस्था और दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो आंदोलन उग्र रूप ले सकता है।
 अपील
इस घटना से स्पष्ट है कि खाद-बीज की आपूर्ति व्यवस्था में पारदर्शिता और निगरानी जरूरी है। यह सिर्फ एक जिले की नहीं, बल्कि देशभर के किसानों की आवाज है, जिन्हें हर सीजन में इसी प्रकार के संकट से जूझना पड़ता है।

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