हाई-टेक साइबर ठगी का चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें खुद को केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) अधिकारी बताकर सायबर ठगों ने एक प्रतिष्ठित परिवार को ‘डिजिटल अरेस्ट’ की धमकी देकर 54 लाख 90 हजार रुपये ठग लिए।
दुर्ग पुलिस की सक्रियता से मामले में अब तक 6 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। हाल ही में महाराष्ट्र के ठाणे जिले से रुषिकेश जोशी और बालकरन जोशी नामक दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि इससे पहले उत्तर प्रदेश के लखनऊ से दीपक गुप्ता, राजेश विश्वकर्मा, कृष्ण कुमार और शुभम श्रीवास्तव को पकड़ा जा चुका है।
कैसे रचा गया फर्जीवाड़े का जाल
सायबर ठगों ने भिलाई निवासी नम्रता चंद्राकर के पिता को वीडियो कॉल कर खुद को CBI अधिकारी बताया, और यह झूठा आरोप लगाया कि उनके नाम से केनरा बैंक में एक खाता खुलवाकर उसे नरेश गोयल नामक व्यक्ति को बेचा गया, जिससे 2 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग की गई है।
इसके बाद परिवार को डिजिटल अरेस्ट की धमकी दी गई और भय का माहौल बनाकर परिवार की संपत्तियों की जानकारी ली गई। 29 अप्रैल से 29 मई 2025 के बीच चंद्राकर परिवार से किस्तों में कुल 54.90 लाख रुपए वसूले गए।
पुलिस की कार्रवाई
दुर्ग पुलिस ने शिकायत के बाद तत्काल एफआईआर दर्ज कर खाते और लेन-देन की गहन जांच शुरू की। आईटी एक्ट और IPC की ठगी संबंधी धाराओं के तहत मामला दर्ज कर अब तक कुल 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस ने बताया कि इस जालसाज गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है और जल्द ही उन्हें भी गिरफ्तार किया जाएगा।
यह घटना न केवल डिजिटल सुरक्षा की गंभीर चुनौती उजागर करती है, बल्कि साइबर अपराधियों की बढ़ती पहुंच और मानसिक भय का मनोवैज्ञानिक शोषण करने की खतरनाक प्रवृत्ति को भी सामने लाती है। पुलिस की तत्परता से गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है, परंतु डिजिटल जागरूकता की कमी ऐसे अपराधों को लगातार बढ़ावा दे रही है।