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पद्मश्री डॉ. सुरेंद्र दुबे को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की श्रद्धांजलि, साहित्य और हास्य की दुनिया को अपूरणीय क्षति

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मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज रायपुर में पद्मश्री सम्मानित कवि, साहित्यकार एवं हास्य व्यंग्य के सम्राट डॉ. सुरेंद्र दुबे को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री उनके निवास पर पहुंचे, जहां उन्होंने पार्थिव शरीर पर पुष्प अर्पित कर अंतिम दर्शन किए और शोक-संतप्त परिवारजनों से मिलकर संवेदना प्रकट की।
इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा , वित्त मंत्री  ओ. पी. चौधरी, अनेक जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ अधिकारी एवं समाज के गणमान्य नागरिक भी उपस्थित रहे।
डॉ. सुरेंद्र दुबे ने अपनी विशिष्ट हास्य शैली, गहरी सामाजिक समझ और कवित्वपूर्ण प्रस्तुति के माध्यम से भारतीय साहित्य जगत में एक अमिट छाप छोड़ी। उनकी कविताओं में जहां गुदगुदाने वाली हास्य की धार थी, वहीं सामाजिक विसंगतियों पर करारा व्यंग्य भी देखने को मिलता था।
कविता और व्यंग्य की दुनिया में एक युग का अंत
डॉ. दुबे न केवल एक उत्कृष्ट कवि थे, बल्कि मंचीय प्रस्तुतियों में भी उनकी पकड़ बेमिसाल थी। वे ‘कवि सम्मेलन’ की आत्मा माने जाते थे और देशभर में उनकी कविताओं को खूब सराहा जाता था। टीवी कार्यक्रमों में भी वे आम लोगों की भावनाओं को सरल भाषा में हास्य के माध्यम से प्रस्तुत करने के लिए पहचाने जाते थे।
भारत सरकार ने उनकी अद्वितीय साहित्यिक सेवाओं के लिए उन्हें पद्मश्री सम्मान से अलंकृत किया था। वे पेशे से आयुर्वेदाचार्य थे, लेकिन उनकी आत्मा हमेशा कविता में बसती थी।
छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि समूचे देश ने एक ऐसा रचनाकार खो दिया है, जो अपनी वाणी और विचारों से लोगों के चेहरों पर मुस्कान लाने का काम करता रहा।
मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि “डॉ. सुरेंद्र दुबे की साहित्यिक विरासत आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देती रहेगी। उनका जीवन सादगी, संवेदना और रचनात्मक ऊर्जा का प्रतीक था। हम सबको उनकी कमी हमेशा खलेगी।”

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