जिले में खराब सड़कों के खिलाफ प्रदर्शन करना कांग्रेस विधायक ब्यास नारायण कश्यप समेत 12 जनप्रतिनिधियों को महंगा पड़ गया। खोखसा ओवरब्रिज (NH-49) पर किए गए चक्काजाम को लेकर पुलिस ने विधायक, ग्राम जर्वे (च) की सरपंच, उनके पति और अन्य 9 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है।
यह प्रदर्शन 30 जून की सुबह लगभग 11 बजे किया गया था, जिसमें ग्रामीणों के साथ जनप्रतिनिधियों ने खोखसा ओवरब्रिज से पिथमपुर मार्ग तक की बदहाल सड़क को लेकर विरोध जताया और मार्ग को घंटों बाधित कर दिया। चक्काजाम के कारण राहगीरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शन में स्कूली बच्चों को भी शामिल किया गया, जिससे भारतीय न्याय संहिता और बालकों की देखरेख व संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन हुआ है।
क्या है मामला
ग्राम जर्वे की सड़कें बीते लंबे समय से जर्जर हालत में हैं। ग्रामीणों ने लगभग एक साल पहले भी प्रदर्शन किया था, लेकिन प्रशासन के आश्वासन के बावजूद कार्य शुरू नहीं हुआ। इसी से नाराज होकर ग्रामीणों ने खोखसा ओवरब्रिज पर 6 घंटे तक चक्काजाम कर प्रदर्शन किया।
बाद में अपर कलेक्टर की समझाइश और विधायक ब्यास नारायण कश्यप की कलेक्टर से फोन पर हुई बातचीत के बाद प्रदर्शन समाप्त किया गया। कलेक्टर ने एक सप्ताह में मरम्मत कार्य शुरू कराने और दिसंबर तक टेंडर प्रक्रिया पूरी कर निर्माण शुरू करने का आश्वासन दिया।
विधायक की चेतावनी
प्रदर्शन के दौरान विधायक ब्यास नारायण कश्यप ने कहा, “यदि तय समय पर सड़क निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ, तो मैं अपनी विधायक निधि से 3 करोड़ रुपये खर्च कर स्वयं सड़क बनवाऊंगा।”
अब सवाल यह उठता है कि –
क्या सड़क की मांग करना गुनाह है?
क्या जनता के साथ खड़े होने वाले जनप्रतिनिधियों को इसी तरह जवाब मिलेगा?
यह मामला अब सिर्फ सड़क के खराब हालात का नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक विरोध की अभिव्यक्ति और प्रशासन की जवाबदेही का बड़ा सवाल बन गया है।