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आत्मानंद स्कूल बना रिश्वत का अड्डा — विधवा, निर्धन माताओं से भी वसूली, मासूम भविष्य के साथ खिलवाड़”

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 जिले के अर्जुनी स्थित आत्मानंद अंग्रेजी /हिंदी माध्यम स्कूल में बच्चों के प्रवेश को लेकर गंभीर अनियमितताओं और रिश्वतखोरी का मामला सामने आया है। ये मामला सिर्फ एक स्कूल की बदनामी नहीं, बल्कि प्रदेश के शिक्षा तंत्र और सामाजिक न्याय पर गहरी चोट है — और वह भी तब, जब यह स्कूल प्रदेश के राजस्व मंत्री के विधानसभा क्षेत्र में स्थित है।
मिली जानकारी अनुसार, आत्मानंद स्कूल में इस वर्ष निःशुल्क प्रवेश प्रक्रिया के बदले प्रति छात्र चार से दस हजार रुपये तक की अवैध वसूली की जा रही है। यह राशि स्कूल की जनभागीदारी अध्यक्ष चित रेखा साहू के माध्यम से स्वयं प्राचार्य द्वारा मांगी जा रही है।

गरीबी से जूझती मां से भी ‘एडमिशन फीस’ वसूली समोसा बेचकर अपनी बच्ची को पढ़ाने का सपना देखने वाली प्रतिमा गौड़ ने बताया कि उन्होंने अपनी बेटी के दाखिले के लिए चार हजार रुपये देने की बात कही थी, लेकिन तंगी के कारण अभी केवल दो हजार ही दे सकी हैं। यह स्थिति न केवल सिस्टम की संवेदनहीनता को उजागर करती है, बल्कि शिक्षा के नाम पर होने वाले खुले बाज़ार को भी नंगा करती है।
विधवा हीरा यादव की पीड़ा — “बेटी के भविष्य के लिए रिश्वत दी”
विधवा हीरा यादव, जो अपने वृद्ध सास-ससुर के साथ रहती हैं, ने अपने दो बच्चों का दाखिला कराने के लिए जनभागीदारी अध्यक्ष को दस हजार रुपये दिए। उन्होंने बताया, “मैंने अपनी बेटी के उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद में ये कदम उठाया, लेकिन यहां तो रिश्वत के बिना कोई सुनवाई ही नहीं होती — न विधवा का दर्द देखा गया, न मासूम बच्चों की मजबूरी।”
जनप्रतिनिधियों की भी अनदेखी
जनपद सदस्य और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी बताया कि जब उन्होंने खुद बच्चों के प्रवेश के लिए प्राचार्य से निवेदन किया, तो उन्हें ‘सीट फुल’ का बहाना देकर टाल दिया गया। वहीं, ग्राम पंचायत के सरपंच की भी बातों को अनदेखा कर दिया गया। जबकि उन्हीं सीटों पर जनभागीदारी अध्यक्ष के माध्यम से अवैध पैसे लेकर अन्य बच्चों को प्रवेश दिया गया।
जांच और सख्त कार्रवाई की मांग
स्थानीय जनप्रतिनिधियों और अभिभावकों ने प्रदेश शासन से मांग की है कि प्राचार्य और जनभागीदारी अध्यक्ष को तत्काल पद से हटाकर पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच करवाई जाए। यह केवल भ्रष्टाचार का मुद्दा नहीं, बल्कि गरीब, विधवा और बेसहारा परिवारों की उम्मीदों और मासूम बच्चों के भविष्य से जुड़ा गंभीर मामला है।
आत्मानंद स्कूल जैसे संस्थानों से समाज उम्मीद करता है कि वे गरीबों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अवसर देंगे, लेकिन जब वही संस्थान भ्रष्टाचार का अड्डा बन जाए, तो यह पूरे शिक्षा तंत्र की नींव को हिला देता है। अब देखना यह है कि शासन-प्रशासन इस गंभीर मामले पर क्या कार्रवाई करता है — या फिर यह भी किसी फाइल के नीचे दबकर रह जाएगा ।

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