आजादी का अमृतकाल और छत्तीसगढ़ राज्य के स्थापना का रजत वर्ष मनाया जा रहा है, लेकिन कवर्धा जिले की जनपद पंचायत बोड़ला के ग्राम पंचायत मुड़घुसरी मैदान के आश्रित ग्राम बंजरीहा आज भी मूलभूत सुविधाओं से कोसों दूर है।
गांव में 22 परिवार विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा समुदाय के और 2 परिवार अन्य आदिवासी रहते हैं। यह बस्ती राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले बैगा समुदाय का हिस्सा है, लेकिन उनकी स्थिति बेहद दयनीय है।
न सड़क, न शिक्षा, न इलाज गांव तक पहुंचने के लिए आज तक सड़क नहीं बनी। बीमार पड़ने पर मरीज को खाट में डालकर अस्पताल पहुंचाना ग्रामीणों की मजबूरी है। शिक्षा के लिए खोला गया आंगनबाड़ी केंद्र भी विवादों के कारण वर्षों से बंद पड़ा है। कुछ बच्चे छात्रावास व आश्रम में रहकर पढ़ाई कर पा रहे हैं, लेकिन 90 प्रतिशत से ज्यादा लोग आज भी अशिक्षा के अंधेरे में हैं।
विकास के नारों में गुम हकीकत देश अमृत महोत्सव और छत्तीसगढ़ रजत वर्ष के उत्सव में व्यस्त है, मगर बंजरीहा के बैगा परिवार अब भी संविधान प्रदत्त मौलिक अधिकारों से वंचित हैं। सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी न्यूनतम सुविधाओं का अभाव यहां के लोगों के लिए जीवन संघर्ष बना हुआ है।
ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से गुहार लगाने के बावजूद उनकी सुनवाई नहीं होती। सवाल उठता है कि जब राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र ही उपेक्षा का शिकार हैं, तो फिर विकास की योजनाएं किनके लिए हैं ।