कवर्धा। “साधु संतों के दर्शन से मनुष्य के पाप धूल जाते हैं और जीवन में आध्यात्मिक प्रकाश का संचार होता है।” यह बात कथा वाचक कामत प्रसाद ने कवर्धा में चल रही धार्मिक कथा में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कही।
उन्होंने रामायण प्रसंग का उल्लेख करते हुए बताया कि राजा दशरथ अगस्त ऋषि के आश्रम पहुंचे थे। अगस्त ऋषि के आदेशानुसार जब दशरथ लंका पर प्रहार के लिए बाण चला रहे थे, तभी स्वयं ब्रह्मा जी प्रकट होकर उन्होंने रोक दिया। ब्रह्मा जी ने दशरथ को समझाया कि रावण का वध उनके द्वारा नहीं बल्कि उनके पुत्र भगवान श्रीराम के हाथों होगा।
कथा वाचक ने श्रद्धालुओं को भक्ति मार्ग की महिमा समझाते हुए कहा – दोनों हाथ ऊपर कर भगवान का नाम लेना और भजन गाना ही प्रभु को दंडवत प्रणाम करने के समान है।
कामत प्रसाद ने एक अद्भुत प्रसंग सुनाते हुए बताया कि राधव नामक मछली ने कौशल्या को निगल लिया था। राजा दशरथ ने रावण का स्वरूप धारण कर समुद्र में प्रवेश किया और कौशल्या को उस संकट से मुक्त कराया।
उन्होंने कहा कि यह प्रसंग दर्शाता है कि ईश्वर भक्ति और धर्म रक्षा के लिए राजा दशरथ सदैव तत्पर रहे।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और कथा श्रवण कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया।