कवर्धा , बोड़ला विकासखण्ड के तरेगांव परियोजना अंतर्गत धनवाही और चेंद्रादादर गांव स्थित आंगनबाड़ी केंद्र 20 सितम्बर शनिवार को निर्धारित समय (सुबह 9:30 से शाम 3:30 बजे) पर निरीक्षण के दौरान ताले में बंद पाए गए। यह न केवल स्थानीय ग्रामीणों के लिए आक्रोश का विषय है, बल्कि संविधान प्रदत्त बच्चों के मौलिक अधिकारों और सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों का भी सीधा उल्लंघन है।
आंगनबाड़ी का उद्देश्य और महत्व
आंगनबाड़ी केंद्र समेकित बाल विकास सेवा (ICDS) योजना के तहत संचालित होते हैं।
इनका प्रमुख उद्देश्य—
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0 से 6 वर्ष तक के बच्चों को पौष्टिक आहार, स्वास्थ्य और प्री-स्कूल शिक्षा उपलब्ध कराना,
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गर्भवती और धात्री माताओं को पूरक पोषण देना,
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कुपोषण की रोकथाम और बाल मृत्यु दर में कमी लाना।
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सुप्रीम कोर्ट और सरकार के नियम
सुप्रीम कोर्ट ने 2001 और उसके बाद कई आदेशों में कहा है कि आंगनबाड़ी केंद्र प्रतिदिन खुले रहने चाहिए और पात्र लाभार्थियों को समय पर भोजन मिलना चाहिए।
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 की धारा 4 और 5 के तहत बच्चों और गर्भवती महिलाओं को पोषण आहार उपलब्ध कराना राज्य सरकार की कानूनी जिम्मेदारी है।
केंद्र और राज्य सरकार दोनों ने निर्देश दिए हैं कि आंगनबाड़ी समय से बंद करना या अनुपस्थित रहना गंभीर लापरवाही मानी जाएगी।
निरीक्षण में उजागर लापरवाही
निरीक्षण में न केवल केंद्र ताले में बंद मिले, बल्कि आसपास के कई केंद्रों में बच्चों को भोजन कराने के बाद समय से पहले ही बंद कर दिया गया।






