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डॉक्टरों ने किया दुर्लभ ‘एब्डोमिनल प्रेग्नेंसी’ केस में सफल ऑपरेशन — 40 वर्षीय महिला और शिशु दोनों को मिला नया जीवन

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 चिकित्सा जगत के लिए गर्व का क्षण — मेकाहारा रायपुर के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की टीम ने असंभव को संभव कर दिखाया। अत्यंत दुर्लभ और जटिल स्थिति में 40 वर्षीय गर्भवती महिला की सफल डिलीवरी कर माँ और शिशु दोनों को नया जीवन दिया गया है।
यह मामला सेकेंडरी एब्डोमिनल प्रेग्नेंसी का है — जिसमें भ्रूण गर्भाशय में नहीं बल्कि पेट (एब्डोमिनल कैविटी) में विकसित हो रहा था। डॉक्टरों के अनुसार यह न केवल मध्य भारत का पहला बल्कि विश्व के अत्यंत दुर्लभ मामलों में से एक है।
इस जटिल ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम देने वाली मेकाहारा की मल्टीडिसीप्लीनरी टीम में शामिल थे —
स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग से डाॅ. ज्योति जायसवाल, डाॅ. रुचि किशोर गुप्ता, डाॅ. सुमा एक्का, डाॅ. नीलम सिंह, डाॅ. रुमी,एनेस्थीसिया विभाग से डाॅ. शशांक और डाॅ. अमृता,तथा जनरल सर्जरी विभाग से डाॅ. अमित अग्रवाल।
कई घंटे तक चले इस सर्जिकल चैलेंज में डॉक्टरों की टीम ने न सिर्फ माँ का जीवन बचाया, बल्कि पेट में विकसित हो रहे शिशु को भी सुरक्षित जन्म दिया। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में मृत्यु दर अत्यधिक होती है, लेकिन मेकाहारा रायपुर की टीम ने चिकित्सा इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है।
यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ के चिकित्सा क्षेत्र की क्षमता, विशेषज्ञता और समर्पण का प्रमाण बन गई है — जिसने पूरे देश में गर्व की अनुभूति कराई है।

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