कवर्धा। कबीरधाम जिले के स्वास्थ्य विभाग में एक और बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र के आधार पर सरकारी नौकरी करने का आरोप झेल रहे अजय कुमार देवांगन के खिलाफ अब तक कोई ठोस जांच या कार्रवाई नहीं हुई है। यह मामला छत्तीसगढ़ विधानसभा में भी उठ चुका है, लेकिन विभागीय उदासीनता अब भी बनी हुई है।
स्वास्थ्य संचालक, रायपुर ने विधानसभा के तारांकित प्रश्न क्रमांक 2187 का हवाला देते हुए संबंधित अधिकारियों से जानकारी मांगी है कि फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र के आधार पर सेवा में कार्यरत कर्मचारियों पर क्या कार्रवाई की गई है। इसी क्रम में अजय कुमार देवांगन का नाम लगातार सामने आ रहा है, जिन पर लंबे समय से फर्जी प्रमाण पत्र के जरिए नौकरी करने का आरोप है।
सूत्रों के अनुसार, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ), कबीरधाम ने 15 जनवरी 2025 को जांच के नाम पर अजय कुमार देवांगन का तबादला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र झलमला, विकासखंड बोड़ला में कर दिया। लेकिन, चौंकाने वाली बात यह है कि अजय देवांगन न तो वहां कभी कार्यस्थल पर पहुँचे हैं, न ही उनकी उपस्थिति दर्ज है – बावजूद इसके उन्हें नियमित वेतन भुगतान जारी है।
सबसे गंभीर बात यह है कि सीएमएचओ द्वारा अब तक न तो किसी जांच समिति का गठन किया गया है और न ही अजय कुमार देवांगन को उनकी दिव्यांगता के सत्यापन हेतु मेडिकल कॉलेज, रायपुर भेजा गया है। इससे स्पष्ट होता है कि मामले को जानबूझकर दबाने की कोशिश की जा रही है।
कबीरधाम स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं का यह एक और उदाहरण है, जहां जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई करने की बजाय लीपापोती में लगे हैं। मामले के तूल पकड़ने के बावजूद, दोषियों को बचाने और शिकायतकर्ताओं को दबाने के लिए पुलिस और न्यायालय की प्रक्रिया का दुरुपयोग भी सामने आ रहा है।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि स्वास्थ्य संचालक को दी जाने वाली रिपोर्ट में सीएमएचओ अजय कुमार देवांगन के संबंध में क्या तथ्य प्रस्तुत करते हैं। क्या इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई होगी या यह भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दफन हो जाएगा ।