धवईपानी में वन विभाग की छापेमारी से हड़कंप, पर बोड़ला से एमपी सीमा तक अछूते ढाबों पर सवाल — वर्षों से जमे अफसर-कर्मचारियों की भूमिका पर भी उठे संदेह!
कवर्धा। भोरमदेव अभ्यारण्य क्षेत्र के धवईपानी में वन विभाग कवर्धा की टीम ने 28 अक्टूबर को सघन जांच अभियान चलाकर तीन ढाबों से अवैध लकड़ी जब्त की। कार्रवाई से क्षेत्र में हड़कंप मच गया, लेकिन सीमित छापेमारी और चुनिंदा ढाबों तक कार्रवाई सिमट जाने से विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं।
निरीक्षण में पंजाबी काका ढाबा से 2 चट्टा जलाऊ लकड़ी, मुकेश ढाबा से 28 नग मिश्रित प्रजाति की बल्लियाँ, और राय ढाबा से 1 चट्टा जलाऊ लकड़ी जब्त की गई।
तीनों मामलों में पी.ओ.आर. क्रमांक 21614/09, 21614/10 एवं 21614/11 दिनांक 28.10.2025 दर्ज किया गया है। वन विभाग ने चेतावनी दी है कि भविष्य में अवैध लकड़ी उपयोग पाए जाने पर कठोरतम कार्रवाई की जाएगी।
सीमित कार्रवाई से बढ़ा संदेह — वर्षों से जमे अफसरों पर भी उठे प्रश्न स्थानीय ग्रामीणों कहना है कि कार्रवाई केवल धवईपानी तक सीमित रही, जबकि बोड़ला से मध्यप्रदेश सीमा तक दर्जनों ढाबे और होटल सरकारी, वन एवं राजस्व भूमि पर वर्षों से अवैध रूप से संचालित हो रहे हैं।कई ढाबों में पक्के निर्माण और लकड़ी का खुला उपयोग आम है, फिर भी विभाग अब तक चुप है।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि वर्षों से एक ही स्थान पर जमे वनकर्मी और अधिकारी इन गतिविधियों से भलीभांति परिचित हैं, पर कार्रवाई केवल चुनिंदा स्थलों पर कर “औपचारिकता” निभाई जा रही है। क्षेत्र में यह चर्चा है कि विभागीय मिलीभगत के बिना इतना बड़ा अवैध ढांचा संभव ही नहीं।
अभ्यारण्य क्षेत्र में अनुचित गतिविधियाँ — नियमों की खुली अनदेखी बोड़ला से धवईपानी तक का अधिकांश क्षेत्र भोरमदेव अभ्यारण्य की परिधि में आता है, जहाँ सामान्य लोगों का प्रवेश व निर्माण कार्य प्रतिबंधित है। बावजूद इसके, ढाबों में सुखी व जलाऊ लकड़ी का नियमित उपयोग जारी है।
लोगो का कहना है कि वन विभाग चाहे तो इन लकड़ियों को काष्ठगार के माध्यम से वैध निस्तारण कर सकता है, पर यह प्रक्रिया वर्षों से ठप है। नतीजतन, अवैध ढांचे और लकड़ी की आपूर्ति दोनों फल-फूल रहे हैं।
वन विभाग का दावा — आगे होगा बड़ा अभियान वन विभाग ने संकेत दिया है कि आगामी दौर में पूरा बोड़ला–चिल्फी मार्ग जांच के दायरे में लिया जाएगा और अवैध निर्माण, लकड़ी उपयोग एवं कब्जों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। ग्रामीणों का कहना है कि अगर जांच निष्पक्ष रही और वर्षों से जमे अफसरों की भूमिका की भी जांच हुई तो भोरमदेव वन क्षेत्र में चल रहे अवैध नेटवर्क पर प्रभावी रोक लग सकेगी।