अभयारण्य में वन्यजीव संरक्षण को लेकर बड़ी लापरवाही सामने आई है। अर्जुनी परिक्षेत्र के दक्षिण महराजी बीट में एक मादा चीतल की सड़ी-गली लाश मिलने के बाद वन विभाग ने जांच में दोषी पाए गए दो कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि दोनों कर्मचारियों ने नियमों को ताक पर रखकर बिना उच्चाधिकारियों की अनुमति और बिना पोस्टमार्टम के ही शव को दफनाया था।
वनमंडलाधिकारी ने बताया कि यह गंभीर अनुशासनहीनता का मामला है। जांच रिपोर्ट के आधार पर वनरक्षक राजेश्वर वर्मा और नरोत्तम पैंकरा को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। मामले की विस्तृत जांच उप वनमंडल अधिकारी कसडोल को सौंपी गई है।
वन्यजीव संरक्षण कानून 1972 के तहत किसी भी जंगली जानवर की मृत्यु की स्थिति में पोस्टमार्टम रिपोर्ट अनिवार्य है। यह रिपोर्ट यह तय करती है कि मौत बीमारी, दुर्घटना या शिकार से हुई है। विभागीय नियमों की अनदेखी न केवल लापरवाही है बल्कि कानूनी उल्लंघन भी माना जाएगा।
स्थानीयों ने उठाए सवाल – “रात में गोली चलने की आवाजें आती हैं”
अभयारण्य से सटे अर्जुनी, महराजी, सिर्री और रिठिया गांवों के लोगों का कहना है कि इलाके में कई बार जंगली जानवरों की मौतें हो चुकी हैं। ग्रामीण रमेश साहू ने बताया कि “रात में अक्सर गोली चलने की आवाजें सुनाई देती हैं, हमने विभाग को कई बार सूचना दी लेकिन जांच के नाम पर केवल औपचारिकता होती है।”
डीएफओ बोले – हर मौत की रिपोर्ट 24 घंटे में अनिवार्य
डीएफओ गणवीर धम्मशील ने कहा, “चीतल की मौत हमारे लिए चेतावनी है। अब हर गश्ती दल की निगरानी GPS और फोटो लॉगिंग के माध्यम से की जाएगी। किसी भी वन्यजीव की मौत की सूचना 24 घंटे के भीतर रेंज कार्यालय तक पहुंचना अनिवार्य होगा।” विभाग जल्द ही हर बीट में ‘वाइल्डलाइफ अवेयरनेस वीक’ मनाने की भी योजना बना रहा है ताकि स्थानीय लोगों को संरक्षण कार्यों से जोड़ा जा सके।
हाल ही की घटनाएँ बढ़ा रहीं चिंता
4 नवंबर को इसी अभयारण्य में हाथियों का एक झुंड एक कच्चे कुएं में गिर गया था, जिन्हें घंटों की मशक्कत के बाद निकाला गया। बारनवापारा में वन्यजीवों की लगातार हो रही घटनाओं से संरक्षण व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।