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एक महीना… शून्य कार्रवाई! कलेक्टर की अनुशंसा की उड़ाई जा रही धज्जियाँ

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 जिले में प्रशासनिक लापरवाही अपने चरम पर है। जनपद पंचायत कवर्धा की अध्यक्ष श्रीमती सुषमा गनपत बघेल द्वारा 24 अक्टूबर 2025 को भेजी गई आधिकारिक शिकायत पर पूरा एक महीना बीत गया, लेकिन कलेक्टर की अनुशंसा के बावजूद आज तक एक भी कार्रवाई नहीं की गई। यह स्थिति साफ दर्शाती है कि जिले में अफसरशाही कलेक्टर के निर्देशों को भी ठेंगा दिखा रही है।
श्रीमती बघेल ने अपने पत्र में कार्यक्रम अधिकारी (मनरेगा )एवं विकासखंड समन्वयक (प्रधानमंत्री आवास योजना ,ग्रामीण ) अशोक कुमार झारिया पर गंभीर आरोप लगाए हैं ।जनप्रतिनिधियों का अपमान करना, उनके निर्देशों की अवमानना, सरपंचों को सामग्री राशि भुगतान में जानबूझकर विलंब करना, और इससे जनपद तथा जिले की छवि को नुकसान पहुंचाना।
पत्र को न केवल कलेक्टर को भेजा गया था, बल्कि प्रतिलिपि
• पंचायत मंत्री एवं विधायक विजय शर्मा,
• मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत,
• सहायक परियोजना अधिकारी मनरेगा,
को भी भेजी गई—फिर भी कार्रवाई शून्य!
इससे यह स्पष्ट होता है कि जिला प्रशासन में फाइलें चलना तो दूर, उठ तक नहीं रही हैं।
“कलेक्टर की अनुशंसा भी लागू नहीं… तो फिर जनता की समस्याएँ कौन सुनेगा”
स्थानीय प्रतिनिधियों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि यदि कलेक्टर के स्तर की अनुशंसा पर ही महीने भर तक कोई कदम नहीं उठाया जाता, तो सामान्य नागरिक की शिकायतों का क्या हश्र होगा ।
जिले की छवि पर असर, विकास योजनाएँ प्रभावित
प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण )जैसे महत्वपूर्ण ग्रामीण आवास मिशन में अधिकारी की मनमानी न केवल शासन की मंशा को नुकसान पहुंचाती है, बल्कि जिले की साख, सरकारी विश्वसनीयता और विकास की गति—तीनों पर असर डालती है।
जनपद अध्यक्ष की स्पष्ट मांग
सुषमा बघेल ने पत्र में मांग की है कि
अशोक झारिया का तत्काल स्थानांतरण किया जाए और लवकेश मरकाम को कार्यक्रम अधिकारी का दायित्व पुनः सौंपा जाए।
लेकिन एक महीने से जारी चुप्पी और सुस्ती यह दर्शाती है कि जिले में अधिकारी ऊपर के आदेशों को भी गंभीरता से नहीं ले रहे।

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