जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) वर्ष 2025–2026 के तहत कोमो–मुडघुसरी जंगल क्षेत्र में स्वीकृत 19.69 लाख रुपये की पुलिया निर्माण कार्य अब गंभीर विवादों में घिरती दिख रही है। गौतरही पंच के घर के पास बनी यह पुलिया शुरुआत से ही ग्रामीणों के निशाने पर है, क्योंकि इसका निर्माण जिस तेज रफ्तार और परिस्थितियों में हुआ है, वह गुणवत्ता पर बड़े प्रश्नचिन्ह खड़े करता है।
परियोजना को 05 अगस्त 2025 को तकनीकी स्वीकृति (क्रमांक–733) और 12 अगस्त 2025 को प्रशासकीय स्वीकृति (क्रमांक–250189733173) दी गई। स्वीकृति के कुछ ही दिनों बाद 24 अगस्त 2025 को निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया। लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि सिर्फ 34 दिनों में, वह भी लगातार भारी बरसात के बीच, पुलिया निर्माण को 27 सितंबर 2025 को पूर्णता प्रदान कर दी गई।
ग्रामीणों का कहना है कि इतने कम समय में, बरसाती मौसम में, मिट्टी और ढांचे की मजबूती सुनिश्चित करना लगभग असंभव है। निर्माण की रफ्तार देखकर ग्रामीण इसे “कागजों में मजबूती, जमीन पर कमजोरी” वाला काम बता रहे हैं।
स्थानीय लोगों के अनुसार, पुलिया के किनारों पर मिट्टी का धंसना, संरचना के आसपास पानी का कटाव यह दर्शाने के लिए काफी हैं कि काम बेहद जल्दबाजी में किया गया।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि गुणवत्ता जांच, इंजीनियरों की नियमित निगरानी और सामग्री परीक्षण जैसी प्रक्रियाओं को नजरअंदाज किया गया।
सरपंच एवं ग्राम पंचायत कोमो–मुडघुसरी द्वारा संचालित इस परियोजना में DMF राशि के उपयोग को लेकर भी व्यापक असंतोष है। ग्रामीणों का कहना है कि 19.69 लाख की लागत वाली पुलिया का इतने कम दिनों में तैयार हो जाना ही इसकी गुणवत्ता को बयान कर देता है।
लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि कार्य की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कहीं जल्दबाजी में धन का उपयोग दिखाकर कमजोर निर्माण तो नहीं कर दिया गया।
DMF जैसी महत्वपूर्ण निधि का इस तरह संदेहास्पद उपयोग न केवल विकास कार्यों की विश्वसनीयता को चोट पहुंचाता है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में अधोसंरचना की सुरक्षा को भी जोखिम में डालता दिखाई दे रहा है।