महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के उद्देश्यों पर सहसपुर लोहारा विकासखंड में खुलेआम सवाल खड़े हो गए हैं। जिला पंचायत कबीरधाम के अंतर्गत जनपद पंचायत सहसपुर लोहारा की ग्राम पंचायत सोनझरी में चल रहे सामुदाय के लिए छोटी नहर नवीनीकरण कार्य में नियमों की अनदेखी सामने आई है।
योजना क्रमांक 3302003015/IC/1111469474 के तहत यह कार्य अघनू के खेत से अंकालू के खेत तक किया जाना है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि मनरेगा के श्रम प्रधान सिद्धांत को ताक पर रखकर पहले ट्रैक्टर से जुताई कराई जा रही है, उसके बाद औपचारिकता के लिए मजदूरों से कार्य कराया जा रहा है।
मनरेगा नियमों का स्पष्ट उल्लंघन मानी जा रही है।
सबसे गंभीर बात यह है कि कार्य स्थल पर निर्माण से संबंधित नागरिक सूचना पटल प्रदर्शित नहीं किया गया, जबकि यह मनरेगा की अनिवार्य शर्तों में शामिल है। न तो लागत का उल्लेख है, न स्वीकृति विवरण, न ही मजदूरों की संख्या—जिससे पारदर्शिता पूरी तरह गायब नजर आती है।
स्थानीय सूत्रों का कहना है कि जिले में मजदूरों की संख्या कागजों में तो भारी दिखाई दे रही है, लेकिन कार्य स्थल पर स्थिति बिल्कुल अलग है।
वास्तविक श्रमिकों की मौजूदगी और मशीनों के उपयोग के बीच भारी अंतर साफ संकेत देता है कि मनरेगा को रोजगार गारंटी की जगह भुगतान गारंटी योजना में तब्दील किया जा रहा है।
ग्रामीणों में चर्चा है कि मशीनरी के उपयोग के मामले में सहसपुर लोहारा विकासखंड जिले में सबसे आगे निकलता नजर आ रहा है, जो मनरेगा की मूल भावना—“काम के बदले मजदूरी”—के ठीक उलट है।
अब सवाल यह उठता है कि
क्या इस मामले की स्वतंत्र जांच होगी।
क्या मशीनों से कराए गए कार्यों पर भुगतान रोका जाएगा ।
या फिर मनरेगा के नाम पर यह खेल यूं ही चलता रहेगा ।
यह मामला सिर्फ सोनझरी गांव तक सीमित नहीं, बल्कि ग्रामीण रोजगार व्यवस्था और सरकारी योजनाओं की विश्वसनीयता पर राष्ट्रीय स्तर का गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है।