जिले के विकासखंड बलौदाबाजार अंतर्गत ग्राम पंचायत परसाभदेर (क) में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत निर्मित नवीन ग्राम पंचायत भवन अब निर्माण के कुछ ही समय बाद भ्रष्टाचार और लापरवाही की तस्वीर पेश कर रहा है।
दिनांक 13 जुलाई 2020 को शुरू हुआ यह भवन निर्माण कार्य 25 मई 2023 को पूर्ण बताया गया। करीब तीन वर्षों की लंबी अवधि में बने इस भवन पर 14.42 लाख रुपये से अधिक की राशि खर्च हुई, जिसमें मनरेगा से 11.42 लाख और RGSY से 3 लाख रुपये शामिल हैं। बावजूद इसके, भवन की दीवारों में जगह-जगह दरारें साफ नजर आ रही हैं, जो निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े कर रही हैं।
147.74 वर्गमीटर क्षेत्रफल वाले इस भवन के लिए 740 मानव दिवस का प्रावधान था, जबकि 756 मानव दिवस सृजित दिखाए गए। श्रमिकों को 204 रुपये प्रतिदिन की दर से भुगतान हुआ, वहीं सामग्री मद में 12.71 लाख रुपये खर्च होना दर्शाया गया है। कागजों में सब कुछ नियमों के अनुरूप दिखाया गया, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण के दौरान घटिया सामग्री का उपयोग किया गया और तकनीकी निगरानी केवल फाइलों तक सीमित रही। यही वजह है कि भवन उपयोग में आने से पहले ही संरचनात्मक कमजोरियां उजागर होने लगी हैं।
उक्त कार्य की निर्माण एजेंसी ग्राम पंचायत परसाभदेर (क) रही, तकनीकी सहायक के रूप में लालिनी वर्मा और लोकपाल के रूप में संतोष श्रीवास्तव का नाम दर्ज है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या इतने वर्षों तक चली परियोजना में गुणवत्ता की जांच कभी गंभीरता से की गई।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी या फिर यह भवन भी मनरेगा के उन ढांचों में शामिल हो जाएगा, जो कुछ वर्षों में ही भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाते हैं। यदि समय रहते जांच नहीं हुई, तो ग्रामीणों के हक का पैसा यूं ही दरारों में समाता रहेगा।
शिकायत के लिए टोल फ्री नंबर 1800-233-2425 उपलब्ध है, लेकिन देखना यह है कि क्या शिकायतों पर कार्रवाई भी होगी या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।