केंवट-निषाद समाज में न्याय और सामाजिक व्यवस्था के नाम पर चलाई जा रही कथित “न्याय पंचायत” अब गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। तलाक, विजातीय विवाह, सगाई टूटने जैसे पारिवारिक मामलों को सुलझाने के बहाने अवैध वसूली, डर-धमकी और सामाजिक बहिष्कार के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं। हालात ऐसे बन गए हैं कि समाज के कई परिवार भय के कारण चुप हैं, जबकि कुछ लोग गांव छोड़कर पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार अर्जुन निषाद, नारायण कैवर्त्य, खेदूराम निषाद, जोतराम निषाद, सत्यवान कैवर्त्य, मोहित कैवर्त्य, डॉ. पुरुषोत्तम कैवर्त्य, गणेश केंवट और ननकू राम निषाद सहित कुछ लोगों पर आरोप है कि वे खुद को समाज का ठेकेदार बताकर बिना किसी वैधानिक या पंजीकृत अधिकार के सामाजिक फैसले सुना रहे हैं और इसके बदले मोटी रकम वसूल कर रहे हैं।
न्याय के नाम पर डर का माहौल
पीड़ित परिवारों का कहना है कि फैसले न मानने पर हुक्का-पानी बंद, समाज से बहिष्कार और सामाजिक अलगाव की धमकी दी जाती है। इसी डर के कारण कई लोग खुलकर सामने नहीं आ पा रहे हैं। बताया जा रहा है कि पिछले साढ़े तीन वर्षों में लाखों रुपये की वसूली हुई, लेकिन आज तक न कोई हिसाब-किताब सामने आया और न ही कोई पारदर्शिता।
खुद शिकायत, खुद जज, खुद सजा
सूत्र बताते हैं कि कथित पंचायत में वही लोग शिकायत सुनते हैं, वही फैसला करते हैं और वही दंड या अमानत की राशि तय करते हैं। यानी न्याय, फैसला और वसूली—सब कुछ एक ही हाथ में होने का आरोप है।
2 दिसंबर का मामला
जानकारी के अनुसार 2 दिसंबर को एक निषाद परिवार से कथित तौर पर हजारों रुपये की वसूली की गई। आरोप है कि परिवार को डराकर शादी कराई गई और बाद में दोबारा रकम वसूली गई। इसके बाद पीड़ित परिवार को लगातार धमकियां दी जाती रहीं।
विजातीय विवाह और सगाई टूटने पर भी वसूली
सूत्रों के मुताबिक—
एक विजातीय विवाह प्रकरण में ₹10,000 अमानत लिए जाने का आरोप
सगाई टूटने के एक मामले में ₹8,500 वसूली
4 जनवरी 2025 को एक अन्य प्रकरण का निपटारा भी इसी कथित टीम द्वारा किए जाने की चर्चा
इन सभी मामलों में वसूली गई राशि के उपयोग को लेकर आज तक कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
समाज सेवा या शोषण?
आरोप यह भी है कि जिन लोगों ने खुद को समाज का नेतृत्वकर्ता बताया, उन्होंने अब तक कोई ठोस समाजहित का काम नहीं किया, बल्कि गरीब और कमजोर परिवारों पर आर्थिक दबाव बनाकर उन्हें और कमजोर किया।
पलायन की मजबूरी
स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र से केंवट-निषाद समाज के कई परिवारों का पलायन हो रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह यही कथित सामाजिक वसूली और डर का माहौल बताया जा रहा है।
प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग
समाज के जागरूक नागरिकों और पीड़ित परिवारों ने जिला कलेक्टर, पुलिस और प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है, ताकि समाज सेवा के नाम पर हो रहे कथित शोषण पर रोक लग सके।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—
क्या न्याय की आड़ में चल रही इस कथित वसूली पर कानून का शिकंजा कसेगा,
या डर के साये में पीड़ितों की आवाज दबी ही रह जाएगी?