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रात 10 के बाद भी ‘डीजे राज’ कायम, बलौदा बाजार में कानून मौन—प्रशासन गहरी नींद में!

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जिला मुख्यालय बलौदा बाजार में ध्वनि प्रदूषण को लेकर बने सख्त कानूनों और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों की खुलेआम अनदेखी हो रही है। रात 10 बजे के बाद भी तेज़ और कर्णभेदी आवाज़ में डीजे बजाए जा रहे हैं, जिससे बच्चों, बुजुर्गों, बीमारों और परीक्षार्थियों को गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
चौंकाने वाली बात यह है कि पुलिस, नगर पालिका और जिला प्रशासन पूरी तरह निष्क्रिय नजर आ रहा है। न डीजे संचालकों पर कार्रवाई हो रही है और न ही अनुमति देने वाले जिम्मेदार अधिकारियों से कोई जवाब-तलब।
 कानून क्या कहता है
ध्वनि प्रदूषण (नियमन एवं नियंत्रण) नियम, 2000
👉 रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर/डीजे पूर्णतः प्रतिबंधित।
सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देश
👉 रात्रिकालीन तेज़ ध्वनि नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन।
भारतीय न्याय संहिता (BNS)
👉 लोक सेवक के आदेश की अवहेलना, सार्वजनिक शांति भंग एवं सार्वजनिक उपद्रव से संबंधित प्रावधानों के तहत दंड का प्रावधान।
पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986
👉 उल्लंघन पर जुर्माना और कानूनी कार्रवाई अनिवार्य।
इसके बावजूद बलौदा बाजार में नियमों को खुलेआम ठेंगा दिखाया जा रहा है, मानो प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त हो।
 जिम्मेदारी किसकी
डीजे की अनुमति जारी करने वाले अधिकारी
संबंधित थाना प्रभारी
नगर पालिका प्रशासन
जिला प्रशासन
यदि रात 10 बजे के बाद भी डीजे बज रहे हैं, तो यह केवल संचालकों की नहीं बल्कि निगरानी में विफल प्रशासन की सीधी जिम्मेदारी है।
जनता की स्पष्ट मांग
रात्रिकालीन डीजे पर तत्काल पूर्ण प्रतिबंध
दोषी संचालकों पर कठोर कानूनी कार्रवाई
लापरवाह अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए
अब देखना यह है कि बलौदा बाजार में कानून वास्तव में लागू होगा या प्रशासन की नींद यूँ ही जारी रहेगी?

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